अब इस पूर्वमंत्री ने उठाए विकास दुबे के Encounter पर सवाल, कही ये बड़ी बात

अब इस पूर्वमंत्री ने उठाए विकास दुबे के Encounter पर सवाल, कही ये बड़ी बात

जबलपुर।संदीप कुमार

कानपुर के कुख्यात अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर मामले पर पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोट ने भी सवाल उठाए हैं।जबलपुर में आज मीडिया से बात करते हुए कहा कि पूर्व मंत्री तरुण भनोट ने कहा इतना वीभत्स अपराध करने वाला सहानुभूति का हकदार नहीं है। लेकिन पुलिस की कार्यशैली और एनकाउंटर पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लिहाजा यह स्पष्ट होना चाहिए कि कुख्यात अपराधी की मदद आखिरकार कौन-कौन कर रहा था। 8 पुलिसकर्मियों को मारने वाले अपराधी का मरना महत्वपूर्ण विषय भी है। लेकिन इस मामले की जांच भी होना चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। किसी भी अपराधी के पीछे राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है विकास दुबे को संरक्षण देने वालों को भी बेनकाब करना चाहिए।

गौरतलब है कि गुरुवार की सुबह विकास दुबे के सरेंडर ….सस्पेंस और सियासत को लेकर दिनभर तमाम बातें होती रही… विकास दुबे के उज्जैन मे सरेंडर करने से लेकर उसे यूपी भेजने तक दिन भर सियासी बयानबाजियों का दौर और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा अब जब विकास का एनकाउंटर हो गया है तो भी राजनीति भी रुकने का नाम नहीं ले रही है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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