भोपाल में शुरू हुई लॉकडॉउन के बाद कोरोना से लड़ने की तैयारियां

भोपाल में शुरू हुई लॉकडॉउन के बाद कोरोना से लड़ने की तैयारियां

भोपाल। मध्यप्रदेश (MADHYAPRADESH)के हॉटस्पॉट (HOTSPOT)बने भोपाल (BHOPAL)में प्रशासन ने अभी से ही लॉकडाउन (LOCKDOWN)के खुलने के बाद की तैयारियां शुरू कर दी हैं|पूरे प्रदेश में इंदौर के बाद दूसरा नंबर भोपाल का ही है जहां कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 214 तक पहुंच गई है| ऐसे में यहां सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन वो सभी इंतेजमात अभी से करने में जुट गया है जिन्हे लॉकडॉउन पीरियड खत्म होने के बाद शहर की सुरक्षा में लगाना है|

शहर के चौराहों पर लगेगी सैनिटाइज मशीने
भोपाल की बात करें तो यह वो जगह है जहां से पूरे प्रदेश को चलाया जाता है| ऐसे में इसकी सुरक्षा एक बड़ी जिम्मेदारी है| प्रशासन ने अभी से ही प्लानिंग कर ली है कि कैसे वो भोपाल को कोरोना के संक्रमण से दूर रखेंगे| शहर में 119 कटेंनमेंट एरिया बनाए गए हैं| प्रशासन ऐसे एरियाओँ के पास के चौराहों, मेन मार्किटस, गर्वेमेंट ऑफिसिस, और ऐसे स्थान जहां हमेशा भीड़-भाड रहती है| उन्हे चिन्हित कर लिया है| इन जगहों पर सैनिटाइज मशीने लगाई जाएंगी| यह मशीने लालबत्ती पर रूकते ही शुरू हो जांएगी| हालांकि यह अभी लॉक़डॉउन कब खुलेगा यह अभी तय नहीं हुआ है| वहीं अधिकारियों का कहना है कि लोगों को रास्ते में, बाजार में अंदर या बाहर आने जाने से पहले , शहर की सीमा में घुसने से पहले अगर मशीनों की मदद से सैनिटाइज किया जाएगा…तो काफी हद तक संक्रमण को रोका जा सकता है|

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Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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