VIDEO: सिंधिया समर्थक मंत्री के बंगले को सील करने पर अड़ा युवक, जमकर हंगामा

VIDEO: सिंधिया समर्थक मंत्री के बंगले को सील करने पर अड़ा युवक, जमकर हंगामा

इंदौर, डेस्क रिपोर्ट

खुद को पूर्व मुख्यमंत्री का पोता बताकर देर रात युवक पहुंचा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के दफ्तर,कोरोना संक्रमित मंत्री तुलसी सिलावट के बंगले को सील करने की मांग करने लगा। दरअसल बलजीत सिंह नामक शख्स रविवार रात मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पूर्णिमा गाडरिया के दफ्तर पहुंचा और मंत्री तुलसी सिलावट के बंगले को सील न करने पर सवाल उठाने लगा।

युवक कह रहा था की आम जनता के संक्रमित होने पर पूरी गली को सील कर दिया जाता है, लेकिन मंत्री के संक्रमित होने पर भी उनके बंगले पर स्टाफ तैनात है। बहरहाल इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियो ने जानकारी जुटाई तो पता चला की यह काम लोक निर्माण विभाग का है लेकिन कुछ देर तक दफ्तर में चले हंगामे के कारण महिला अधिकारी ने कोतवाली थाना पुलिस को युवक के खिलाफ शिकायती आवेदन दिया। पुलिस ने युवक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया हालांकि उसकी जमानत हो जाने की खबर भी सामने आ रही है। बहरहाल, युवक की मांग तो कुछ हद तक जायज ही थी और स्वास्थ्य विभाग की प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस बात की जानकारी भी नही थी कि आखिर कोरोना संक्रमित होने पर बंगले एतियाहतन सील करने का कार्य किस विभाग के पास है। युवक जब महिला अधिकारी से बात कर रहा था उस वक़्त महिला अधिकारी ने फोन पर किसी अन्य अधिकारी को फोन कर इस बात की जानकारी मांगी। युवक ने अंत में खुद की सरकार आने पर महिला अधिकारी को देखने की धमकी भी दे डाली थी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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