रेत माफिया और पुलिस का गठजोड़, कोड नेम के साथ जारी रेत का अवैध कारोबार

रेत माफिया और पुलिस का गठजोड़, कोड नेम के साथ जारी रेत का अवैध कारोबार

डबरा/सलिल श्रीवास्तव

देशभक्ति जन सेवा की बात करने वाली पुलिस इस वैश्विक महामारी के बीच भी पैसा कमाने का कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहती। आज हम आपको जो दिखाने और सुनाने जा रहे हैं उसे देख कर आपको अंदाजा हो जाएगा कि पुलिस अधिकारी इतना दिमाग किसी केस को हल करने में लगाएं तो बड़ी से बड़ी मर्डर मिस्ट्री भी हल हो जाएगी। जिस प्रकार अपराधी कोई ना कोई गलती करता है उसी प्रकार पुलिस से भी गलतियां हो जाती हैं। ताजा मामला पिछोर थाना क्षेत्र का है जहां थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह कुशवाह रेत के काले कारोबार को अलग ही रंग रूप से संचालित कर रहे हैं। इसके लिए एक कोड नेम तैयार किया गया है जिसमें रेत के काले कारोबार में उपयोग होने वाले संसाधनों को अलग-अलग नाम दिया गया है। थाना प्रभारी की यह ऑडियो सुन कर आप खुद समझ जाएंगे कि आखिर माजरा क्या है।

अब हम आपको बताते हैं कि किसे क्या नाम दिया गया है तो सबसे पहला नाम ट्रैक्टर ट्रॉली (TRACTOR TROLLEY) का है जिन्हें थानेदार साहब द्वारा नया नाम दिया गया है उसे कहा गया है घोड़ा (HORSE), तो डंपर को हाथी (ELEPHANT)और पनडुब्बी को जहाज (SHIP) का कोड नेम दिया गया है। यदि घाट पर ट्रैक्टर जाते हैं तो कह दिया जाता है कि आज इतने घोड़े मौजूद है यही हाल कमोबेश डम्पर का है। इनकी बाकायदा एंट्री होती है ट्रैक्टर ट्रॉली की रेट 1500 से 2000 तो डम्पर 5000 प्रति चक्कर आते हैं। वहीं घाट पर डालने वाली पनडुब्बी कहें या जहाज का 15000 से 20000 रुपये का खुला रेट है, जिसे रेत माफ़ियाँ और पुलिस भलीभांति परिचित हैं। सबसे बड़ी बात ऐसे समय में भी अधिकारी सिर्फ अपना हित देख रहे हैं जबकि घाटों पर कितनी भीड़ हो रही है इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं है। ऑडियो अनुविभाग सिर्फ एक अधिकारी का है पर तरीका सब का यही है और सभी थाना क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जारी है।

अब हम आपको बताते हैं की है रेत का यह काला कारोबार कहां कहां और कैसे संचालित है सबसे पहले पिछोर थाने (PICHORE POLICE STATION) की बात करते हैं तो बाबूपुर, लिधौरा और कैथोदा ऐसे घाट हैं जहां पनडुब्बी या जहाज तो नदी में उतरे हुए हैं और प्रतिदिन यहां से आधा सैकड़ा से अधिक ट्रैक्टर और डंपर संचालित हो रहे हैं। गिजौरा थाना क्षेत्र (GIJAURA POLICE STATION) का भी कमोबेश यही हाल है, यहां खेतों से रेत उठाई जा रही है। अब बात करते हैं डबरा सिटी थाना (DABRA CITY POLICE STATION) की तो यहां रेत का धंधा कभी बंद ही नहीं हो पाया। यहां के बेलगढा घाट पर पनडुब्बियां तो हैं ही, प्रतिदिन ट्रैक्टर ट्रॉलियों की भी बड़ी संख्या में आवाजाही बनी हुई है, तो डबरा का देहात थाना (DABRA RURAL POLICE STATION) भी इस कड़ी में पीछे नहीं है, यहां भेसनारी बिजकपुर घाट से प्रतिदिन रेत की आपूर्ति बनी हुई है। भितरवार (BHITARWAR POLICE STATION) के लोहारी घाट को भी 2 दिन पूर्व शुरू कर दिया गया है यहां भी काफी संख्या में पनडुब्बियां नदी में उतार दी गई हैं।

अब बात करते हैं अधिकारियों की, जिनका कहना है कि रेत कैसे शहर में आ रही है और कैसे चल रही है हमें नहीं पता। पर इतना सभी जानते हैं कि यदि पुलिस अपनी पर आ जाए तो एक परिंदा भी उसके थाना क्षेत्र में पर नहीं मार सकता तो फिर यह ट्रैक्टर ट्रॉली और डंपर कैसे थाना क्षेत्रों के सामने से गुजर जाते हैं यह आप स्वयं ही समझ सकते हैं। ऑडियो के सामने आने के बाद यह खेल तो उजागर हुआ ही, और अब थाना प्रभारी पर शायद कार्रवाई भी कर दी जाए पर उसके बाद भी यह खेल लगातार जारी रहेगा क्योंकि जो भी आएगा वह इसी के यानी रेत के लिए ही इन थाना क्षेत्रों में अपनी पोस्टिंग करा रहा है। देखते हैं वरिष्ठ अधिकारी कितनी गंभीरता से इस मामले को लेते हैं और क्षेत्र में रेत के अवैध उत्खनन पर कोई बड़ी कार्यवाही करवाते हैं या फिर रेत माफ़ियाओं से साँठगाँठ का यह सिलसिला ऐसे ही लगातार चलता रहेगा।

जब इस सम्बंध में डबरा एसडीएम राघवेंद्र पांडेय से बात की तो उनका कहना था की
रेत के अवैध उतखनन की जानकारी मिली है, कोरोना डबरा में मरीज़ मिलने के चलते ध्यान नहीं दे पा रहे थे। पूर्व में हमने रेत माफ़ियाओं पर लगातार कार्यवाही की है अब यह सिलसिला फिर शुरू होगा और किसी भी घाट से अवैध उतखनन नहीं होने दिया जायेगा।

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