लॉकडाउन में दुकानदार सरेआम उड़ा रहे सोशल डिस्टेंस की धज्जियां

लॉकडाउन में दुकानदार सरेआम उड़ा रहे सोशल डिस्टेंस की धज्जियां

मुरैना।संजय दीक्षित

कोरोना महामारी(corona pandemic) से बचने लिए कुछ दिनों पहले लॉकडाउन(lockdown) को घोषणा की गई थी।जिसके बाद आमजन को घर मे रहने का आदेश दिया गया था। आम जनता की राहत को देखते हुए किराने की दुकान और मेडिकल खोलने के आदेश दे दिए गए थे।जिसके बाद शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान(CM shivraj singh chouhan) ने कुछ जिलों में किराने ,पेट्रोल पंप(petrol pump) और मेडिकल(medical) खोलने की अनुमति सभी जिला कलेक्टर को आदेश जारी कर दिए थे।

जिसके बाद कलेक्टर(collector) श्रीमती प्रियंका दास ने शनिवार को आदेश जारी किया कि शहर की चुनिंदा दुकानें ही खोली जाएगी और सोशल डिस्टेंस(social distance) का पालन किया जाए।कलेक्टर आदेशानुसार रविवार की सुबह से छोटी बजरिया में दुकानें खुलते ही भारी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी और सरे आम सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ाई जा रही थी।किराने की दुकानों के साथ साथ मोबाइल की दुकान और अन्य दुकाने भी बिना परमिशन के खोली गयी थी।पुलिस की तैनाती के बाद भी सोशल डिस्टेंस की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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