रक्षाबंधन पर बहनों को होना पड़ा निराश, Corona की वजह से जेल में मुलाकात पर प्रतिबंध

रक्षाबंधन पर बहनों को होना पड़ा निराश, Corona की वजह से जेल में मुलाकात पर प्रतिबंध

दमोह, गणेश अग्रवाल

कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते मार्च के महीने में ही जेल में मुलाकात के लिए आने वाले लोगों को प्रतिबंधित कर दिया गया था. ऐसे हालात में जेल में आने वाले हर एक बंदी के परिजनों को मुलाकात पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही किसी भी प्रकार से मिलने नहीं दिया गया. यह प्रतिबंध रक्षाबंधन पर भी लागू है. ऐसे हालात में इस बार रक्षाबंधन पर अपने भाइयों को राखी बांधने आई बहने निराश हो गई हैं.

जिला जेल के बाहर राज्य सरकार के निर्देश के तहत एक बोर्ड लगा दिया गया है, जिसमें जेल में आने वाले घर एक व्यक्ति के लिए अपने जेल में बंद परिजनों से मुलाकात पर लगे प्रतिबंध की जानकारी दी गई है, यह प्रतिबंध बीते मार्च महीने से लगातार लागू है. ऐसे हालात में दूर-दूर से अपने भाइयों को मिलने के लिए पहुंची बहनों के लिए यह त्यौहार निराशा लेकर आया है. जहां जेल प्रशासन राज्य सरकार के निर्देश के बाद मुलाकात पर प्रतिबंध लगाएं हुए है. तो वही रक्षाबंधन पर भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधने पहुंची बहनों को मुलाकात कराने से मना कर दिया गया. जिससे यह लोग निराश हो गए. साथ ही इनको जेल प्रशासन द्वारा समझाएं दी गई है कि वे जानकारी लेकर के ही आए जिससे परेशानी ना हो.

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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