Surya Grahan 2020: मध्यप्रदेश में ‘चांद’ की तरह नजर आया सूर्य

Surya Grahan 2020: मध्यप्रदेश में ‘चांद’ की तरह नजर आया सूर्य

भोपाल।

सुबह दस बजे के बाद देश-विदेश में सूर्य ग्रहण शुरू हो चुका है।सबसे पहले दुबई में 11.10 पर Ring Of Fire का दुर्लभ दृश्‍य दिखाई दिया है।इसके बाद मुंबई, जयपुर, कुरुक्षेत्र समेत भारत के कई शहरों में अलग अलग तरह का ग्रहण दिखाई दिया। कही काले अंधेरे के साथ लाल रंग की रिंग दिखाई दी तो कही हरे रंग। जैसे जैसे सुर्यग्रहण का समय बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे देशभर से तस्वीरें भी सामने आ रही है। एमपी के ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में भी सुर्य ग्रहण की झलक देखने को मिली है।

मध्यप्रदेश में करीब 10.14 बजे शुरू हुआ सूर्य ग्रहण करीब 11.57 इसका मध्य काल में पहुंच गया, इस दौरान सूर्य बिल्कुल चंद्रमा की तरह नजर आने लगा। इंदौर और ग्वालियर में सूर्य ग्रहण के मध्य काल में चंद्रमा ने सूर्य को इस तरह ढंक लिया कि वो चांद की तरह नजर आने लगा। इंदौर में सूर्य ग्रहण बादलों के बीच से भी दिखाई दिया। सूर्य के ऊपर चंद्रमा की परछाई दिखाई देने लगी।जबलपुर में ग्रहण आसमान में सूर्य की तरह नजर आया। वही ग्वालियर में एक चौथाई हिस्सा चंद्रमा ने सूर्य का एक चौथाई हिस्सा ढंका जैसा दिखाई दिया

बता दे कि कि साल के सबसे बड़े दिन आज यानी 21 जून को सूर्य ग्रहण लगना शुरू हो गया हौ।25 साल बाद ये पहला मौका है जब वलायाकार यानी अंगूठी की तरह दिखने वाला ग्रहण लगा है। सूर्य ग्रहण के दौरान भारत के कई शहरों में आसमान में सूर्य का घेरा एक चमकती अंगूठी की तरह नजर आ रहा है। इससे पहले वर्ष 1995 में इस तरह का ग्रहण देखा गया था. सूर्य ग्रहण सुबह 09.15 बजे से शुरू होकर दोपहर 03.04 मिनट पर खत्म होगा।

अमृतसर का सूर्यग्रहण

देहरादून का सूर्यग्रहण

सिरसा का सूर्यग्रहण

लखनऊ का  सुर्यग्रहण

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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