ग्रिल काटकर दुकान में घुसा चोर, दो घंटे तक की चोरी, कैमरे बंद किये फिर भी CCTV में कैद हुई वारदात

ग्रिल काटकर दुकान में घुसा चोर, दो घंटे तक की चोरी, कैमरे बंद किये फिर भी CCTV में कैद हुई वारदात

जबलपुर, संदीप कुमार| जबलपुर (Jabalpur) में चोरों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं | पुलिस (Police) चोरों को पकड़ने का लाख दावा कर रही हो पर चोर है कि लगातार अपने अपराध को अंजाम देने से भी नहीं चूक रहे हैं| ताजा मामला लॉर्डगंज थाना अंतर्गत का है जहां पर की बीती रात चोर ने कपड़े की दुकान में घुसकर करीब 1 लाख 38 हजार रु नगद सहित लाखों रुपए का माल पार कर दिया|

चोरी के दौरान चोर ने दिखाई चालाकी पर नहीं बच सका 
अज्ञात चोर ने कपड़े की दुकान में चोरी करने का समय रात 2:00 से 4:00 के बीच का चुना, चोर दुकान की ग्रिल काटकर अंदर घुसा और फिर उसने सबसे पहले दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे को बंद करना शुरू किया, हालांकि जिस जगह से चोर घुसा था वह कैमरा वो नहीं देख पाया और उसके चोरी की करतूत कैमरे में कैद हो गई चोर दुकान में रात 2:00 बजे से लेकर सुबह 4:00 बजे तक रहा|

चोर ने कैश बॉक्स तोड़ा और कपड़े भी ले गया चोरी करके
अज्ञात चोर करीब 2 घंटे तक दुकान में घुसकर पहले तो कैमरे बंद करके पूरी छानबीन की और उसके बाद फिर दुकान का कैश बॉक्स तोड़ा और उसमें रखे 138000 रु पार कर दिए, चोर को इस पर भी संतुष्टि नहीं हुई तो फिर उसने करीब ढाई लाख रुपए के कपड़े लेकर वहां से निकल गया, घटना के बाद व्यापारी हैं लॉर्डगंज थाने में चोरी की शिकायत दर्ज करवाई है, फिलहाल पुलिस ने अज्ञात चोर के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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