जब राशन का बोरा सिर पर रख सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री ने लगाई दौड़, वीडियो वायरल

जब राशन का बोरा सिर पर रख सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री ने लगाई दौड़, वीडियो वायरल

ग्वालियर।अतुल सक्सेना

मंत्री रहते हुए नाले में उतरकर खुद गंदगी साफ कर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आये पूर्व खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर खुद को जनता का एक सेवक कहते हैं। इसीलिए उन्हें कोई भी काम करने में जरा भी झिझक नहीं होती। वे कहते हैं कि जनता ने हमें कुर्सी बैठकर आराम करने के लिए नहीं दी है बल्कि उसकी सेवा करने के लिए दी है। इसलिए वे अपना काम करते हैं। अब सोशल मीडिया पर प्रद्युम्न सिंह तोमर का वीडियो वायरल हो रहा है।

जिसमें वे राशन से भरा बोरा सिर पर उठाये दौड़ लगा रहे हैं। दरअसल लॉक डाउन में अपनी विधानसभा के जरूरतमंद गरीब लोगों की मदद के लिए प्रद्युम्न सिंह तोमर खुद लगे हैं। वे रोज अपनी तरफ से सेंकड़ों लोगों को उनके घर जाकर राशन बाँट रहे हैं। इसी दौरान वार्ड क्रमांक तीन में उरवाई गेट के पास कंट्रोल की दुकान पर सरकारी राशन खत्म हो गया। यहाँ लोग राशन के लिए परेशान हो रहे थे । तभी राशन खत्म होने की सूचना प्रद्युम्न सिंह तोमर को मिली तो उन्होंने अपना राशन सप्लाई वाहन उरवाई गेट की तरफ मोड दिया। चूंकि वाहन गली में जा नहीं सकता था और भीड़ भी थी। फिर क्या था, पूर्व मंत्री ने राशन से भरा बोरा सिर पर उठाया और गली में दौड़ लगा दी। पूर्व मंत्री ने राशन कंट्रोल की दुकान पर पहुंचाया तब जाकर गरीबों को राशन मिल पाया। सिंधिया समर्थक पूर्व खाद्य मंत्री का ये वीडियो सोशल मीडिया पर इस समय खूब वायरल हो रहा है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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