युवक की चाकू मारकर हत्या, आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

युवक की चाकू मारकर हत्या, आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

संदीप कुमार//जबलपुर।

होली पर्व में ससुराल आये एक युवक को इलाके के चार से पांच युवकों ने मिलकर चाकूओं से गोद दिया।वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी जहाँ मौके से फरार हो गए वही परिजनों ने घायल युवक को ईलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।जानकारी के मुताबिक मृतक युवक का नाम बलराम पटेल था जो कि रामपुर का रहने वाला था।आज होली के पर्व पर मृतक बलराम पटेल अपने ससुराल गोकलपुर पंचायती कुआं आया हुआ था। होली त्योहार मनाने के बाद शाम को जब बलराम अपने घर जाने की तैयारी कर रहा था तभी इलाके के ही हिमांशु, सनी और अमन से गाड़ी स्टार्ट करने को लेकर बलराम से विवाद हो गया।मामूली रूप से शुरू हुआ बलराम का विवाद कुछ देर में इतना बढ़ गया कि हिमांशु और उसके साथियों ने चाकू निकाला और बलराम पर हमला कर दिया।तीनो ने एक के बाद एक कई वार उस पर किए।शोर की आवाज सुनकर बलराम के ससुराल पक्ष के लोग भी बाहर निकल आए और उसे बचाने लगे पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।बलराम के परिजन उसे पहले रांझी सिविल अस्पताल और फिर जिला अस्पताल लेकर पहुँचे जहाँ उसकी मौत हो चुकी थीं।

बताया जा रहा है कि बलराम रेल्वे में प्राइवेट नोकरी करता था और क्रेन चलाता था।बलराम का गोकलपुर निवासी अशोक पटेल की बेटी के साथ कुछ माह पहले ही विवाह हुआ था।आज मृतक पहली दफा अपने ससुराल आया था तभी उस पर मामूली विवाद को लेकर हमला कर दिया गया।फिलहाल हत्या करने वाले आरोपी अभी फरार बताए जा रहे है।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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