मप्र में यहां दिखा भारत बंद का असर, सुबह से नही खुली दुकानें

मप्र में यहां दिखा भारत बंद का असर, सुबह से नही खुली दुकानें

शेख रईस ।बुरहानपुर।

नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी के विरोध में लोगों ने बुधवार शहर बंद का आग्रह किया था जिसका आज सुबह से ही बुरहानपुर में अच्छा खासा असर देखने को मिला। सुभाष चौक,इक़बाल चौक,मंडी बाजार सहित शहर भर में जगह जगह सुबह से लोगो ने अपने अपने प्रतिष्ठान कारोबार बंद रखे।रोज सुबह गुलज़ार रहने वाला सब्जी मंडी, अनाज मंडी,होटल गुमटियां आज सुबह से बंद के समर्थन में नही खुली।

मंगलवार दिनभर इस बंद को लेकर चर्चाएं चलती रही। सोशल मीडिया पर संदेश चलें बाजार बंद रखने का आग्रह करने के लिए शाम को संगठनों के लोग परवेज़ सलामत,अजयसिंह रघुवंशी, डॉ एस.एम.तारिक,आरिफ बागवान सहित कई जनप्रतिनिधियों गणमान्य नागरिक ने दुकानदारों के पास पहुंचे और दुकाने बंद रखने का आग्रह किया था।

देश भर के साथ साथ बुरहानपुर में भी बंद की सूचना मिलते ही प्रशासन भी अलर्ट हो गया रात से पुलिस विभाग ने सुरक्षा संबंधी तैयारियां शुरू कर दी।हालांकि इसमें कोई संगठन खुलकर सामने नहीं आया है, लेकिन हम भारत के लोग के बैनर तले शहर बंद रखने की बात कही जा रही है। उल्लेखनीय है कि शहर में पिछले कुछ दिनों से सीएए और एनआरसी के विरोध में रैलियां निकाली गई, कलेक्टोरेट में प्रदर्शन किया गया। सोमवार से शौकत गार्डन में भी रोज शाम में विरोध प्रदर्शन जारी है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews