रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया नवरात्रि से पहले पांच बैंकों पर सख्ती (RBI Action) दिखाई है। नियमों का सही से अनुपालन न करने के आरोप में भारी मौद्रिक जुर्माना लगाया है। इस लिस्ट में गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना के बैंक शामिल हैं। किसी ने केवाईसी तो किसी से बीमा और अन्य बैंकिंग नियमों का उल्लंघन लिया है। इस बात की जानकारी आरबीआई ने 25 सितंबर 2025 को दी है।
गुजरात के वडोदरा में स्थित मकरपुरा इंडस्ट्रियल एस्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कर्नाटक के द साउथ केनरा जिला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 1.50 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।
आंध्र प्रदेश के द गुंटुर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड पर और तमिल नाडु सर्किल पोस्ट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। गायत्री को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड जागतियल तेलंगाना पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के विभिन्न प्रावधानों के तहत उठाया गया है।
आखिर क्या है वजह?
गायत्री को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड जागतियल तेलंगाना ने पर्याप्त डिस्क्लोजर और ट्रांसपेरेंसी के बिना अपने ग्राहकों को इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचें। तमिलनाडु सर्किल पोस्ट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने एसएएफ के तहत जारी किए गए के तहत निर्देशों का पालन न करते हुए जमाराशियों पर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा दी जाने वाली ब्याज दरों से अधिक ब्याज दरों की पेशकश की। द गुन्टूर को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड ने निर्धारित समय के भीतर ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर अपलोड नहीं किया।
द साउथ केनरा डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में हाउसिंग फाइनेंस पर जारी विवेकपूर्ण जोखिम सीमा का उल्लंघन किया। साथ ही बीआर अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अन्य सहकारी समितियां में शेयर भी रखा।
मकरपुरा इंडस्ट्रियल एस्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड वडोदरा गुजरात ने कुछ खातों के जोखिम वर्गीकरण की आवधिक समीक्षा नहीं की, जो कम से कम 6 महीने में एक बार होनी चाहिए थी। आरबीआई द्वारा निर्धारित साइबर सुरक्षा स्ट्रक्चर के अंतर्गत कुछ साइबर सुरक्षा नियंत्रण उपायों को लागू करने में भी विफल रहा।
कार्रवाई से पहले हुई थी सुनवाई
31 मार्च 2024 को इन बैंकों के फाइनेंशियल स्टेटस को चेक करने के लिए आरबीआई ने निरीक्षण किया था। जिसमें दिशा निर्देशों के अनुपालन में खामियों का खुलासा हुआ। सभी बैंकों को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया। नोटिस के जवाब के रूप में बैंकों ने अपनी सफाई दी और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान अपना पक्ष भी रखा। जिस पर आरबीआई ने विचार करने के बाद आरोपों को सही पाया गया और पेनाल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
ग्राहकों पर प्रभाव पड़ेगा या नहीं?
केंद्रीय बैंक ने यह कदम बैंकिंग में पारदर्शिता और अनुशासनअनुशासन सुनिश्चित करने के लिए उठाया है। इससे ग्राहकों के हितों की रक्षा भी होगी। इस एक्शन का प्रभाव बैंकों और ग्राहकों के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन पर नहीं पड़ेगा। जमा राशि पूरी तरीके से सुरक्षित रहेगी। पहले की तरह लेन देन, पैसों की निकासी और अन्य सेवाओं का लाभ कस्टमर उठा पाएंगे।






