केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपने संबद्ध स्कूलों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। CBSE का यह कदम कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को सुचारू रूप से लागू करने की दिशा में उठाया गया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 11 और 12 में पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को ऑन-स्क्रीन मार्किंग की अनिवार्य प्रैक्टिस पूरी करनी होगी।
CBSE द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार यह तैयारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कॉपियों का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया को बिना किसी त्रुटि के लागू करने के लिए आवश्यक है। शिक्षकों को OASIS डेटा अपडेट होने के बाद लॉग-इन आईडी और पासवर्ड प्रदान किए जाएंगे, जिसके माध्यम से वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जाकर अभ्यास कर सकेंगे।
स्कूलों के लिए क्या हैं जरूरी दिशानिर्देश
बोर्ड ने स्कूलों को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। प्रिंसिपल को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके स्कूल के सभी संबंधित शिक्षक इस प्रैक्टिस प्रोग्राम में भाग लें। शिक्षकों को स्कूल परिसर से ही लॉग-इन करके सिस्टम पर कई बार अभ्यास करना अनिवार्य है।
CBSE ने निर्देशित किया है कि प्रैक्टिस के दौरान दिए गए सभी निर्देशों का पूर्णतः पालन किया जाए। यह प्रक्रिया शिक्षकों को वास्तविक मूल्यांकन के समय आने वाली तकनीकी चुनौतियों से परिचित कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
निगरानी के लिए विशेष डैशबोर्ड की व्यवस्था
CBSE ने स्कूलों को एक विशेष डैशबोर्ड भी मुहैया कराया है। इस डैशबोर्ड के जरिए प्रिंसिपल रीयल टाइम में यह देख सकेंगे कि कितने शिक्षकों का डेटा अपडेट हो चुका है। साथ ही वे यह भी जान सकेंगे कि कितने शिक्षकों ने प्रैक्टिस पूरी कर ली है और कितने अभी बाकी हैं।
इस डिजिटल निगरानी प्रणाली से स्कूल प्रशासन को अपने संस्थान में प्रगति ट्रैक करने में सहायता मिलेगी। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा कि कोई भी शिक्षक इस अनिवार्य प्रैक्टिस से छूट न जाए।
एक सप्ताह के लिए उपलब्ध रहेगी प्रैक्टिस सुविधा
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह प्रैक्टिस सुविधा 16 फरवरी से शुरू होकर लगभग एक सप्ताह तक चलेगी। इस सीमित अवधि में सभी शिक्षकों को अपना अभ्यास पूरा करना होगा। यह समय सीमा इसलिए रखी गई है ताकि वास्तविक परीक्षा परिणामों के मूल्यांकन से पहले सभी शिक्षक डिजिटल प्रक्रिया में पूर्णतः दक्ष हो जाएं।
डिजिटल मूल्यांकन की यह पहल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में CBSE का एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में मानवीय त्रुटियों को कम करने और परिणामों की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है।





