गौरिहार थाने से हटाईं गईं थाना प्रभारी सरिता वर्मन फाइलें लेकर गायब

गौरिहार थाने से हटाईं गईं थाना प्रभारी सरिता वर्मन फाइलें लेकर गायब

छतरपुर, संजय अवस्थी
थाना क्षेत्र के ग्राम रेवना में एक संदेहास्पद मौत के मामले में उचित कार्यवाही नहीं करने के आरोपों के कारण पूर्व विधायक विजय बहादुर सिंह के धरने के उपरांत थाने से हटाई गईं गौरिहार थाना प्रभारी सरिता वर्मन पिछले 24 घंटों से थाना पुलिस के संपर्क में नहीं है। उन्हें एसपी ने 10 अगस्त को पूर्व विधायक द्वारा एसपी ऑफिस में किए गए धरने के बाद लाइन अटैच किया था। उन्होंने न तो लाइन में आमद दी है और न ही वे थाने में मौजूद हैं। उधर नवागत थाना प्रभारी जसवंत सिंह राजपूत ने उनकी गैर मौजूदगी में चार्ज तो संभाल लिया है लेकिन थाने में कई संगीन मामलों की केस फाइल नहीं मिल रही हैं।

खुद थाना प्रभारी जसवंत राजपूत ने इस बात की पुष्टि की है कि थाने में 302, 376, 307 जैसे कुछ संगीन मामलों की डायरियां नहीं है। मुंशी से पूछे जाने पर उसने बताया कि डायरियां मेडम के पास हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक थाना प्रभारी जसवंत राजपूत के चार्ज संभालने के पहले ही उक्त डायरियां थाने से हटाई गईं। इस मामले की जानकारी थाना प्रभारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी है। सूत्र यह भी बताते हैं कि सरिता वर्मन पुन: अपने राजनैतिक शुभचिंतकों की मदद से गौरिहार थाना पाने के प्रयास में जुटी हुई हैं। खबर लिखे जाते समय उनके मोबाइल पर भी संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन अटेण्ड नहीं किया।

इनका कहना-

फिलहाल मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। फिर भी ये विभाग का इंटरनल मामला है। डायरियां जहां होंगी वहां से थाने पहुंच जाएंगी।

सचिन शर्मा, एसपी, छतरपुर

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews