MP में एक परिवार है उंगलियों से परेशान, यहाँ लोगों के हाथ-पैर में 24-28 उँगलियाँ, डॉक्टर ने कही ये बात

MP में एक परिवार है उंगलियों से परेशान, यहाँ लोगों के हाथ-पैर में 24-28 उँगलियाँ, डॉक्टर ने कही ये बात

छतरपुर, डेस्क रिपोर्ट। इन मनुष्य का शरीर प्राकृतिक की देन होती है। शरीर का हर भाग खास और एक बेहतरीन आर्ट का प्रतीक है। लेकिन मध्यप्रदेश (MP) के छतरपुर में एक ऐसा मामला आया जो आपको सोचने ओर मजबूर कर देगा की आखिर ऐसा कैसा हो सकता है। जी हाँ छतरपुर में एक ऐसा परिवार है जो पैसे की कमी या बीमारी से नहीं बल्कि अधिक उंगलियों से परेशान है। लोगों ने आम तौर पर यह सुना होगा की किसी के हाथ में ज्यादा से ज्यादा 7 उँगलियाँ हो सकती है। लेकिन इस परिवार के सदस्यों के हाथ और पैर में 24 से लेकर 28 उँगलियाँ है।

यह भी पढ़े… सावन का पहला सोमवार नजदीक, भगवान शिव को लगाए उनके पसंदीदा मीठे पकवानों का भोग, जानें

एक नॉर्मल इंसान में हाथ और पैर को मिलाकर 20 उँगलियाँ होती है। यह एक अजूबा है, कुदरत का करिश्मा या फिर कोई बीमारी इसका वर्णन करना मुश्किल है। यह आधुनिक युग में साइंस के आगे एक चुनौती की तरह सामने आ खड़ा हुआ है। परिवार में पिता और 3 बच्चे इस अजीब सी बीमारी का शिकार बन चुके हैं। सूत्रों की माने तो ऐसा एक दुर्लभ बीमारी के वजह से हुआ है। हालांकि की ऐसा मामला भारत में पहली बार सामने आया है।

जिला अस्पताल के डॉ मनोज चौधरी का कहना की ऐसे मामले पॉलीडेक्टली होते हैं। परिवार के सभी सदस्यों की उंगलियों की पूरी लंबाई हड्डियाँ से कनेक्टेड है, जो आमतौर पर नहीं होता है, इसलिए इसका अध्ययन करना जरूरी है। डॉक्टर के मुताबिक यह बीमारी 10,000 में एक 1-2 को होती है। वहीं इस समस्या से पीड़ित लोगों की बात करें तो उन्हें कोई दैनिक कार्यों को करने में दिक्कत होती है। साथ ही आसपास के लोग उन्हें छंगा और अन्य अलग-अलग नामों से बुलाते हैं।

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews