पुणे से पैदल आ रहे मजदूर ने छतरपुर में फांसी लगाई, हाइवे किनारे पेड़ से झूलता मिला शव

पुणे से पैदल आ रहे मजदूर ने छतरपुर में फांसी लगाई, हाइवे किनारे पेड़ से झूलता मिला शव

छतरपुर| लॉक डाउन (Lockdown) के बीच प्रवासी मजदूरों की घर वापसी का दौर जारी है| इस बीच कई मजदूर हादसे के शिकार भी हो चुके हैं| इस बीच छतरपुर में पुणे से सागर लौट रहे एक श्रमिक युवक का शव नेशनल हाइवे के किनारे पेड़ से झूलता मिला। लॉकडाउन में वह पुणे में फंसा था।

जानकारी के मुताबिक संतोष रैकवार पुत्र नन्नू रैकवार निवासी ग्राम हरदी थाना गढ़ाकोटा जिला सागर सुबह 6 बजे उसे अनगौर के शासकीय अस्पताल के सामने फोन पर बात करते हुए देखा गया और इसके बाद उसने यहीं लगे एक पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी। वह महाराष्ट्र के पूना में फंसा हुआ था। वह किसी तरह बीती रात एक ट्रक के माध्यम से छतरपुर जिला मुख्यालय पहुंचा था।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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