पेड़ों की कटाई और कोयला खनन परियोजनाओं को रोकने की मांग को लेकर हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने मंगलवार को अंबिकापुर के गांधी चौक पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। समिति ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर हसदेव अरण्य में खनन परियोजनाओं की स्वीकृति रद्द करने की अपील की।
हसदेव अरण्य में परसा ईस्ट केते बासेन, परसा और केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉकों के लिए राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड को दी गई अनुमति के तहत अदानी समूह द्वारा खनन कार्य किया जा रहा है। इससे करीब 12 लाख पेड़ों की कटाई हो रही है। यह क्षेत्र हसदेव और रिहंद जैसी नदियों का जलग्रहण क्षेत्र है। खनन से जल स्रोतों का सूखना, नदियों का प्रदूषण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का विनाश हो रहा है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष बढ़ रहा है।
नाट्यशाला को गंभीर खतरा
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि खनन गतिविधियों और भारी विस्फोटों से विश्व की प्राचीनतम रामगढ़ पहाड़ी और नाट्यशाला को गंभीर खतरा है। समिति ने 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित अशासकीय संकल्प का हवाला देते हुए सभी कोल ब्लॉकों को रद्द करने की मांग की। भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, खनन से मानव-हाथी संघर्ष और गंभीर हो सकता है।
फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों की जांच
समिति ने हसदेव को नो-गो क्षेत्र घोषित करने, रामगढ़ पहाड़ी की वैज्ञानिक जांच, फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों की जांच, प्रभावित ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमों को रद्द करने और प्रदूषित अपशिष्ट पर रोक लगाने जैसी मांगें उठाईं। इसके अलावा, खनन क्षेत्रों में पुनर्भरण और वृक्षारोपण के साथ-साथ हाल ही में पेड़ गिरने से मरे मजदूर के परिवार को मुआवजा देने की भी मांग की गई।





