मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का सफलतापूर्वक समापन रविवार को हो गया है। दो दिवसीय चिंतन शिविर में नेतृत्व विकास, सुशासन, तकनीक, कृषि, पर्यटन और विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
कार्यक्रम के समापन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे और उन्हें जल्द ही नीतिगत एवं प्रशासनिक स्तर पर लागू किया जाएगा।
सीएम साय ने कहा, चिंतन शिविर में विशेषज्ञों के अनुभव, मंत्रिपरिषद के मंथन और प्रशासनिक नेतृत्व के सामूहिक विचारों से जो सुझाव प्राप्त हुए हैं, वे भविष्य में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों की आधारशिला बनेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में ‘चिंतन शिविर 3.0’ एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
‘चिंतन शिविर 3.0’ में विकास के विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा: अरुण साव
वहीं, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि ‘चिंतन शिविर 3.0’ में विषय विशेषज्ञों ने न सिर्फ अलग-अलग विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए एवं मंत्रियों के साथ भी बातचीत हुई। अरुण साव ने कहा, चिंतन शिविर में ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें इसके लाभ, वर्तमान प्रयासों और अब तक मिले सकारात्मक परिणामों पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान यह स्पष्ट किया गया कि ऑर्गेनिक खेती लाभदायक नहीं होने जैसी धारणा सही नहीं है।
उन्होंने बताया कि शिविर में सुशासन और पर्यटन विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी मंथन हुआ। भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं और राज्य को प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह चिंतन शिविर एक महत्वपूर्ण मंथन सत्र रहा, जिससे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को नई सोच और दिशा मिली। साथ ही यहां से प्राप्त सुझाव राज्य की नीतियां बनाने और विकास कार्यों को गति देने में उपयोगी साबित होंगे। उनका कहना था कि इस आयोजन का लाभ आने वाले समय में पूरे छत्तीसगढ़ को मिलेगा।





