छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल को रायपुर में दर्ज 14 धार्मिक विवाद के मामलों में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें तीन महीने की अंतरिम जमानत मंजूर की है। हालांकि, जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई गई हैं। इनमें सबसे अहम शर्त यह है कि अमित बघेल अगले तीन महीने तक रायपुर जिले की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे, उन्हें तय तारीखों पर कोर्ट में पेशी के लिए रायपुर आने की अनुमति होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में राज्योत्सव से ठीक पहले शुरू हुआ था। वीआईपी चौक पर लगी छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को अज्ञात व्यक्ति ने तोड़ दिया था, जिसके बाद तनाव बढ़ गया। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के सदस्य मौके पर पहुंचे और जमकर हंगामा किया। इस दौरान क्रांति सेना के कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी झड़प भी हुई थी, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
इसी हंगामे और विरोध प्रदर्शन के दौरान अमित बघेल ने अग्रवाल और सिंधी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनकी इन टिप्पणियों के बाद रायपुर के अलग-अलग थानों में उनके खिलाफ कुल 14 मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में धार्मिक भावनाओं को आहत करने और समाज में वैमनस्य फैलाने जैसे आरोप शामिल थे। अमित बघेल इन मामलों के दर्ज होने के बाद से फरार चल रहे थे।
पुलिस लगातार अमित बघेल की तलाश कर रही थी। बाद में अमित बघेल ने स्वयं थाने के बाहर आत्मसमर्पण करने का प्रयास किया। वे थाने से करीब 20 मीटर पहले पहुंचे ही थे कि पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए उन्हें पकड़ लिया। इस गिरफ्तारी को लेकर भी काफी विवाद हुआ था, लेकिन पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराया।
पुलिस हिरासत में रहते हुए अमित बघेल की मां का निधन
इन कानूनी पेचीदगियों के बीच अमित बघेल को एक बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी से भी गुजरना पड़ा। जब वे पुलिस हिरासत में थे, तभी उनकी मां का निधन हो गया था। पुलिस कस्टडी में रहते हुए ही उन्होंने अपनी मां का अंतिम संस्कार किया था। इस घटना ने पूरे मामले को एक मानवीय पहलू भी दिया था, जिस पर उस समय काफी चर्चा हुई थी और कई संगठनों ने उनकी रिहाई की मांग की थी।
मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं। अमित बघेल के वकीलों ने उनकी ओर से पक्ष रखा और जमानत की मांग की, जबकि राज्य सरकार ने उनके खिलाफ दर्ज मामलों की गंभीरता को रेखांकित करते हुए जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अमित बघेल को अंतरिम जमानत देने का फैसला सुनाया।
कोर्ट ने शर्त के साथ दी जमानत
जमानत देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट शर्तें लगाई हैं। इनमें मुख्य शर्त यह है कि बघेल अगले तीन महीने तक रायपुर जिले की सीमा में निवास नहीं करेंगे। उन्हें केवल कोर्ट में तय तारीखों पर पेशी के लिए ही रायपुर आने की अनुमति होगी। यह शर्त सुनिश्चित करती है कि वे जमानत की अवधि में रायपुर में किसी नए विवाद को जन्म न दें और शांति व्यवस्था बनी रहे।
फिलहाल, अमित बघेल को इन 14 मामलों में तीन महीने की अंतरिम राहत मिल गई है, लेकिन रायपुर जिले में प्रवेश पर लगी रोक उनके लिए एक बड़ी बाध्यता है। इन मामलों की आगे की सुनवाई और अमित बघेल के अगले कदम पर सबकी नजर बनी रहेगी, क्योंकि यह फैसला छत्तीसगढ़ की राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।





