इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट 2026: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चावल निर्यातकों को दी बड़ी सौगात, मंडी शुल्क में छूट की अवधि बढ़ी

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार, 10 जनवरी 2026 को रायपुर के मायरा रिजॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट (IIRS-2026) में शिरकत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मंडी शुल्क में दी जा रही छूट की अवधि को एक साल और बढ़ाने का ऐलान किया।
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार, 10 जनवरी 2026 को रायपुर के मायरा रिजॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट (IIRS-2026) में शिरकत की। यह समिट भारत की चावल इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच माना जा रहा है। इस अवसर पर सीएम साय ने चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात दी है। उन्होंंने मंडी शुल्क में दी जा रही छूट की अवधि को एक साल और बढ़ाने का ऐलान किया। सीएम के इस फैसले से चावल उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा और निर्यात को और गति मिलने की उम्मीद है।

बता दें कि चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल दी गई छूट की अवधि दिसंबर 2025 में समाप्त हो रही थी, जिसे अब एक साल और बढ़ा दिया गया है। इससे छत्तीसगढ़ से चावल के निर्यात को और बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी विदेशी मेहमानों का किया स्वागत

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रायपुर के मायरा रिजॉर्ट में IIRS-2026 समारोह में सम्मिलित होकर हार्दिक प्रसन्नता हुई। इस दूसरे संस्करण में देश-विदेश के निर्यातक, क्रेता और विशेषज्ञों की अभूतपूर्व सहभागिता रही। सीएम ने छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

सीएम ने कहा कि किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों के हित में हमारी सरकार ने प्रतिबद्धता दर्शाते हुए चावल निर्यात पर मंडी शुल्क शून्य रखने का निर्णय लिया है। इससे न केवल हमारे किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि चावल के वैश्विक व्यापार को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि छत्तीसगढ़ के दुबराज, और जीराफूल जैसी प्रीमियम किस्में विश्व मंच पर छत्तीसगढ़ का परचम लहराएंगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा, इस आयोजन में 12 देशों के खरीदारों और 6 देशों के दूतावास प्रतिनिधियों की मौजूदगी से प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को यूं ही ‘धान का कटोरा’ नहीं कहा जाता, यहां हजारों किस्म की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के जीराफूल और दुबराज जैसे सुगंधित चावल देश-विदेश में अपनी खास पहचान रखते हैं।

Shyam Dwivedi
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