डबरा रेलवे स्टेशन से 22 साल से फरार 5 हजार रुपये का इनामी वारंटी गिरफ्तार, नकली नोट के मामले में था फरार

पुलिस के मुताबिक 2004 में नकली नोट के मामले में पकड़ा गया था आरोपी, करीब एक साल जेल में रहने के बाद हुआ था फरार, बल्लभगढ़ में रहकर लंबे समय से नहीं हुआ न्यायालय में पेश
Dabra Police Arrested Rewarded Warrantee

Dabra Police Arrested Rewarded Warrantee

डबरा नकली नोट के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे 5 हजार रुपये के इनामी स्थायी वारंटी को डबरा सिटी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी करीब 22 साल से फरार था। उसे डबरा रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया।

पुलिस के अनुसार, ग्वालियर जिले में फरार और इनामी वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान 19 अगस्त को डबरा सिटी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि नकली नोट के मामले में फरार अरविंद जाट डबरा रेलवे स्टेशन पर मौजूद है।

मुखबिर की सूचना पर रेलवे स्टेशन पहुंची पुलिस

सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई। इसके बाद एसडीओपी डबरा सौरभ कुमार के मार्गदर्शन और थाना प्रभारी संजय शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां मुखबिर के बताए हुलिए के आधार पर एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

पुलिस के मुताबिक पूछताछ में उसने अपना नाम अरविंद पिता स्वर्गीय बहादुर सिंह जाट, निवासी ग्राम चुरली, थाना पिछोर, जिला ग्वालियर बताया।

2004 में पकड़ा गया था आरोपी

पुलिस के अनुसार, अरविंद वर्ष 2004 में नकली नोट के मामले में पकड़ा गया था। करीब एक साल जेल में रहने के बाद वह फरार हो गया था। इसके बाद वह फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ क्षेत्र में रहने लगा और लंबे समय तक न्यायालय में पेश नहीं हुआ।

आरोपी के खिलाफ न्यायालय से स्थायी वारंट जारी किया गया था। वहीं वर्ष 2013 में पुलिस अधीक्षक ग्वालियर ने उसकी गिरफ्तारी पर 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। अब डबरा सिटी थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। यह कार्रवाई ग्वालियर पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के निर्देशन में की गई।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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