दमोह के दामाद थे अजित जोगी, उनके निधन से शहर में शोक की लहर

दमोह के दामाद थे अजित जोगी, उनके निधन से शहर में शोक की लहर

दमोह/गणेश अग्रवाल

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के निधन से दमोह में शोक की लहर है। दमोह जोगी की ससुराल है और इस लिहाज से वो यहां से बेहद करीब से जुड़े रहे हैं। उनके साले स्वर्गीय रत्नेश सालोमन दिग्विजय सरकार में मंत्री रहे हैं तो उनके भतीजे और भतीजी आज भी इलाके में राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। जैसे ही जोगी के निधन का समाचार मिला परिवार में शोक की लहर छा गई। पूर्व मंत्री सालोमन के बेटे और बेटी के पास लोगों ने पहुंचकर संवेदनाएं जाहिर की। दमोह जिले के जबेरा से विधानसभा की प्रत्याशी रही तान्या सालोमन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि परिवार ने अपना मुखिया खोया है वहीं उनके भतीजे आदित्य सालोमन ने कहा कि उनकी कमी को कभी पूरा नही किया जा सकता।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews