एमपी में हुए एसआईआर यानी मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूचियों के प्रकाशन के बाद कई जगहों पर गड़बड़ी की बातें सामने आ रही है इसी क्रम में दमोह में भी एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है जहां एक वार्ड में 37 ऐसे लोग है जो जिंदा है लेकिन उन्हें मृत बताकर उनके नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए है इनमें आईटीबीटी का जवान और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी शामिल है जो सरकारी नौकरी में है सेवाएं दे रहे हैं लेकिन उन्हें मृत बताकर उन्हें लिस्ट से डिलीट कर दिया गया है।
दरअसल मतदाता सूचियों के सामने आने के बाद दमोह शहर के बजरिया वार्ड नम्बर 5 के लोगों ने अपने नाम वोटर लिस्ट में तलाशना शुरू किए तो लोग हैरान रह गए क्योंकि एक दो नहीं बल्कि 37 ऐसे लोग थे जिनके नाम लिस्ट में नहीं थे और खास बात ये है कि ये तमाम नाम मुस्लिम समाज के लोगों के है। जब लिस्ट में नाम नहीं मिले तो लोगों ने अपने निर्वाचन कार्यालय में संपर्क किया तो उन्हें मालूम चला कि ये 37 लोग कागजों में मर चुके है और ये जानकारी बीएलओ ने नहीं दी बल्कि एक नाम हेमंत का आया जिसने फार्म भरकर इलाके के एसडीएम को दिए और बताया कि ये लोग जिंदा नहीं है।
जिंदा लोग प्रशासन से कर रहे गुहार
खुद के मरे होने की जानकारी सामने आने के बाद अब जिंदा लोग प्रशासन से कह रहे हैं कि साहब आइए देखिए हम जिंदा है हमें भी अपना वोट डालने का अधिकार दीजिए। अब सवाल यही की आखिर इतनी बड़ी खामी कैसे आई तो साफ है कि किसी भी दावा आपत्ति की जांच के बिना ही वोटर लिस्ट से लोगों के नाम हटाए गए हैं।
कलेक्टर ने दी ये सफाई
उधर इस हैरान करने वाले मामले के सामने आने के बाद कलेक्टर ने अपनी सफाई दी है। कलेक्टर सुधीर कोचर की माने तो अभी दावे आपत्ति का समय है और पूरी प्रक्रिया जारी है जिस जिस मतदाता को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से हटाया गया है वो दावा कर सकता है, यदि निचले स्तर पर वो संतुष्ट नहीं है तो कलेक्टर के पास अपील कर सकता है। उन्होंने कहा किसी भी मतदाता को लिस्ट में नाम से वंचित नहीं रखा जाएगा।





