पॉजिटिव निकले बैंक कर्मचारियों के संपर्क में आए लोगों की तलाश टेढ़ी खीर

पॉजिटिव निकले बैंक कर्मचारियों के संपर्क में आए लोगों की तलाश टेढ़ी खीर

दतिया| सत्येंद्र रावत| बैंक ऑफ इंडिया (Bank OF India) के 9 कर्मचारियों के एक साथ कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) निकलने से जिले में हड़कंप मच गया है| अब प्रशासन मरीजों को चिन्हित कर उन इलाकों को कंटेनमेंट जोन (Containment Zone) घोषित करने की तैयारी कर रहा है| वहीं जानकारी जुटाई जा रही है कि कोरोना संक्रमित किन-किन लोगों के संपर्क में आये|

सोमवार देर शाम आई रिपोर्ट के बाद अपर कलेक्टर विवेक रघुवंशी, एसडीएम अशोक चौहान एवं एसडीओपी गीता भारद्वाज सहित प्रशासनिक अमला पॉजिटिव मरीजों के इलाकों में पहुंचे| बैंक ऑफ इंडिया के जो कर्मचारी कोरोना अपोजिट ऑफ आए हैं। उन लोगों के संपर्क में कौन-कौन आया और बैंकों में कितने लोगों की आवक जावक हुई। जो पॉजिटिव लोगों के संपर्क में आए। यह जानकारी लगाना प्रशासन के लिए बड़ी टेढ़ी खीर मानी जा रही है। शहर में चर्चा का माहौल गर्म है। वहीं लोगों में भय का माहौल व्याप्त कि अब होगा क्या, क्या फिर से दतिया के बाजारों को बंद किया जाएगा क्योंकि एक साथ 9 लोगों का कोरोना पॉजिटिव आना दतिया से के लिए बड़ी आपदा समान है।

प्रशासन ने आमजन को निर्देश दिए हैं। वहीं जानकारी लगाने में भी जुटा हुआ है कि इन कर्मचारियों में से क्लीयरिंगहाउस कौन जाता था। जिससे अन्य बैंकों के कर्मचारियों के संक्रमित होने का खतरा बन सकता है। प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि सभी सोशल डिस्टेंस के नियमों का पूरा पालन करें और मुंह पर मास्क अवश्य लगाएं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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