रक्षाबन्धन विशेष: यहां हर साल इंसानियत की कलाई पर बंधता है पवित्रता का बंधन

रक्षाबन्धन विशेष: यहां हर साल इंसानियत की कलाई पर बंधता है पवित्रता का बंधन

बागली, सोमेश उपाध्याय

जहां एक ओर सांप्रदायिकता के नाम पर देश दुनिया में लोग अनावश्यक वैमनस्यता फैलाते हैं, वहीं दूसरी ओर बागली में सांप्रदायिक सद्भाव व सौहार्द्रता की मिशाल देखी जाती है।कुछ ऐसा ही रक्षाबंधन के त्यौहार पर भी होता है!कहते है राखी का बंधन सबसे प्यारा होता है!इस बन्धन भाई-बहन का प्यार जीवन पर्यंत बना होता है।लेकिन जब यह भाई-बहन का प्यार मजहब से ऊपर उठ जाता है तब पूरी कायनात इसका इस्तकबाल करती है!पवित्र रिश्ते की ऐसी ही मिशाल बागली में देखने को मिलती है।दरअसल बागली के नजदीक आरिया की बालिका रीना किकरिया को सन 2012 में टाइफाइड हो गया था।रीना के माता-पिता मजदूरी के लिए गुजरात चले गए थे।बड़ा भाई दिव्यांग है।बीमारी के दौरान रीना की तबियत गम्भीर हो गई थी।तब विद्यालय के प्राचार्य वारिस अली बिटिया को अपने घर लाए और स्वयं के व्यय से निजी चिकित्सालय में उपचार करवाया।इसी अंतराल में अली की पत्नी शाहिस्ता व बेटे उबेद व तौबेज अली से रीना के पारिवारिक सम्बन्ध बन गए।फिर क्या था रीना हर रक्षाबन्धन पर अली परिवार में पहुँच जाती है।शिक्षक अली बताते है कि उनकी भी कोई बेटी नही है।इसलिए रीना से दिल का रिश्ता बन गया।अली परिवार को प्रत्येक वर्ष रक्षाबंधन पर रीना का इंतज़ार रहता है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews