लॉकडाउन में भी लुटेरों के हौसले बुलंद, गैस टंकियों सहित वाहन लेकर हुए फरार

लॉकडाउन में भी लुटेरों के हौसले बुलंद, गैस टंकियों सहित वाहन लेकर हुए फरार

धार ।।।राजेश डाबी । जिले के टांडा थाना क्षेत्र के ग्राम चुनप्या के पास उज्ज्वला योजना अंतर्गत वितरित की जाने वाली गंधवानी की एचपी गैस एजेंसी की गैस टंकी भरे वाहन को लूटे जाने की घटना हुई है | जिसमें लुटेरों द्वारा वाहन सहित भरी 40 खाली टंकी एवं 20 भरी टंकियों के साथ ही ड्राइवर और मौजूद व्यक्ति के पास से लगभग 45 हजार रुपये ,4 मोबाइल एवम नगदी आदि लेकर लुटेरे फरार हो गए हैं ।

घटना आज दोपहर 4 बजे की बताई जा रही है| पीड़ित के अनुसार जब वे वाहन लेकर के जा रहे थे तो रास्ते में पत्थर जमे हुए थे वही पीछे से मोटरसाइकिल से आए लुटेरे ने वाहन के सामने बाइक अड़ा दी, चार पहिया वाहन के रुकते ही पीछे से 15 से 20 लुटेरे आ धमके जिन्होंने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया , उन सभी के हाथों में पत्थर थे । मजबूरी में चार पहिया वाहन में बैठे लोगों ने वाहन रोक दिया , उन्हें लूट करके उनका चार पहिया वाहन भी लेकर फरार हो गए।

जहा देश भर में कोरोना के खोफ से लॉक डाउन का दौर है वही जिले में चोर लुटेरों के हौसले बुलंद हो रहे है व 3 दिन में दूसरी बड़ी वारदात घटी है । पिछली घटना में सरदारपुर के पास ग्राम अमोदिया में लुटेरो के हमले में पिता पुत्र की दर्दनाक मौत हो गई थी । आज की घटना के बाद पीड़ित लोग जैसे-तैसे टांडा थाना पहुंचे तथा मामले की एफआईआर दर्ज कराई है वहीं पुलिस मामला जांच कर लुटेरों को तलाश करने की बात कर रही है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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