भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा जारी नई गाइडलाइन के उपरांत धार की ऐतिहासिक भोजशाला में रविवार की सुबह से ही एक विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठान का आरंभ हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय कर दिया। सदियों से हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए आस्था का केंद्र रही यह भोजशाला, जहां मां वाग्देवी का वास माना जाता है, एक बार फिर भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। देर रात तक जारी हुई एएसआई की विस्तृत गाइडलाइन के पश्चात आज भोर होते ही, भारी संख्या में हिन्दू धर्मावलम्बी भोजशाला के द्वार पर एकत्रित होने लगे। उनके हाथों में मां वाग्देवी के श्रद्धापूर्ण चित्र थे, और उनके हृदयों में देवी के प्रति अटूट आस्था का भाव स्पष्ट झलक रहा था।
जैसे ही सूर्य की पहली किरणें धार की धरा पर पड़ीं, भोजशाला के गर्भगृह में पूजा-अर्चना का क्रम प्रारंभ हो गया। इसके पूर्व, परंपरा और शुचिता का निर्वहन करते हुए, गर्भगृह के पवित्र स्थल को गोमूत्र से धोकर शुद्ध किया गया। इस प्रक्रिया ने न केवल स्थान को पवित्रता प्रदान की, बल्कि भक्तों के मन में भी एक गहरी धार्मिक भावना का संचार किया। इसके पश्चात, गर्भगृह को अत्यंत आकर्षक ढंग से सजाया गया। रंग-बिरंगी रंगोलियां बनाई गईं, जिन्होंने परिसर को एक दिव्य और मनमोहक रूप प्रदान किया। इन रंगोलियों की बारीक कलाकृतियां और चमकीले रंग, भोजशाला की प्राचीन दीवारों पर एक नई ऊर्जा का संचार कर रहे थे।
भोजशाला में गूंजी वैदिक मंत्रों की दिव्य ध्वनि
इसी बीच, भोजशाला के ठीक बाहर स्थित ज्योति मंदिर से अखंड जोत को बड़े ही सम्मान और श्रद्धा के साथ भोजशाला के गर्भगृह में स्थापित किया गया। यह अखंड जोत, जो सदियों से प्रज्वलित है, मानो मां वाग्देवी की शाश्वत उपस्थिति का प्रतीक थी। इसके गर्भगृह में स्थापित होते ही, समूचे वातावरण में एक अलौकिक शांति और ऊर्जा का अनुभव किया गया। सूर्योदय के साथ ही, वैदिक मंत्रोच्चार का उद्घोष भी प्रारंभ हो गया। संस्कृत के पवित्र श्लोक और मंत्र, भोजशाला के कण-कण में गूंजने लगे, जिससे वहां उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और आध्यात्म का गहरा अनुभव हुआ। यह मंत्रोच्चार लगातार जारी रहा, जिसने पूरे दिन भोजशाला के माहौल को पवित्रता से ओत-प्रोत रखा।
भोजशाला को आधुनिक तरीके से किया जाएगा विकसित: सीएम डॉ. यादव
इस अवसर पर उपस्थित हिन्दू धर्मावलम्बी अपने आप को इस खुशी और उत्साह के वातावरण में बंधे रहने से रोक नहीं पाए। भक्तों ने जमकर नृत्य किया, अपनी खुशी और श्रद्धा का इजहार किया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर उनके पैर थिरक रहे थे, और उनके चेहरे पर मां वाग्देवी की भक्ति की अनुपम आभा दिखाई दे रही थी। यह दृश्य भोजशाला के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ रहा था, जहां आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपनी बात रखते हुए कहा कि धार की ऐतिहासिक भोजशाला को नए और आधुनिक तरीके से विकसित किया जाएगा। उनका यह बयान भोजशाला के भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगाता है, जिससे यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना रहेगा, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी अपनी गरिमा को और अधिक बढ़ाएगा। यह विकास भोजशाला के प्राचीन महत्व को अक्षुण्ण रखते हुए उसे समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।





