जनता कर्फ्यू का असर: दुकानें बंद, अपने घरों में लोग कैद, पुलिस प्रशासन मुस्तैद

जनता कर्फ्यू का असर: दुकानें बंद, अपने घरों में लोग कैद, पुलिस प्रशासन मुस्तैद

डिंडौरी।प्रकाश मिश्रा। जनता कर्फ्यू का असर जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षैत्रों में देखने को मिल रहा है पूरे शहर की दुकानें बंद हैं,सड़को पर सन्नाटा पसरा हुआ है, लोग जनता कर्फ्यू को अपना समर्थन दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर साफ तौर पर जिला मुख्यालय मैं दिखाई दे रहा है। सुबह से ही लोग अपने घरों में रहकर कोरोना महामारी से निपटने के लिए बंद को सफल बनाने के लिए अपना समर्थन दे रहे।

जिला पुलिस भी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शहर में लगातार पेट्रोलिंग करते हुए आम जनता को समझाइस दे रही है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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