लॉक डाउन: खाकी ने पेश की मानवता की मिसाल, मजदूरों को पहुंचाया घर

लॉक डाउन: खाकी ने पेश की मानवता की मिसाल, मजदूरों को पहुंचाया घर

डिंडौरी। प्रकाश मिश्रा।

कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न हुई इस त्रासदी में पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा परेशानी उन मजदूर वर्गों की है जो रोजी रोटी कमाने के लिए अपना गांव अपना घर अपना परिवार छोड़कर दूसरे शहरों में गए हुए थे। अचानक से सामने आए इस करोना रूपी संकट में हजारों की संख्या में मजदूर अभी भी दूसरे शहरों में फंसे हुए हैं।

ताजा मामला 28 मार्च का है जहाँ लगभग 20 मजदूरों का एक जत्था जबलपुर से चलकर डिंडौरी पहुंचा। जहां एसडीओपी रवि प्रकाश कोतवाली प्रभारी सी के सिरामे यातायात प्रभारी राहुल तिवारी ने मजदूरों को खाने पीने की व्यवस्था करते हुए उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वाहन का इंतजाम कर रवाना किया। बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे मजदूरों ने आप बीती बताते हुए कहा कि वह सभी जबलपुर में मजदूरी करने गए थे अचानक कोरोना वायरस के कारण वही फंस कर रह गए । मजदूरों ने बताया कि जहां वह काम कर रहे थे वहां काम भी बंद हो गया जिसके कारण उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी खत्म हो गई आवागमन का कोई साधन ना होने के कारण वह पैदल ही अपने घर के लिए रवाना हो गए। जबलपुर से पैदल चलकर वे निवास पहुंचे जहां निवास थाना प्रभारी के सहयोग से उनके रुकने और खाने की व्यवस्था की गई। इसके बाद एक पिकअप वाहन के माध्यम से उन्हें डिंडौर रवाना किया गया। पुलिस प्रशासन के द्वारा मिली मदद के लिए संकट में फंसे इन मजदूरों ने सराहना करते हुए धन्यवाद दिया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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