बॉलीवुड मेकर्स के लिए लकी चार्म था ये सिंगल स्क्रीन थिएटर, राज कपूर से लेकर अमिताभ बच्चन तक कई सितारों की फिल्में हुई हिट

आजकल शहरों में बड़े-बड़े मल्टीप्लेक्स हो गए हैं। जहां दर्शक 200 ढाई सौ सीट के बीच फिल्मों का आनंद लेते हैं। एक समय ऐसा था जब सिंगल स्क्रीन थिएटर में 1000 दर्शक एक साथ बैठकर फिल्म देखा करते थे। आज हम आपको ऐसे थिएटर के बारे में बताते हैं जो मेकर्स के लिए लकी चार्म था।
Alankar Theatre

पर्दे पर एक्शन और रोमांस करते एक्टर एक्ट्रेस, तालियां और सीटियां बजाती ऑडियंस, भरी हुई बालकनी से लेकर फ्रंट रो, टिकट काउंटर की धक्का मुक्की यह सारे नजारे हमें थिएटर में दिखाई देते हैं। पुराने थिएटर में यह ज्यादा दिखाई देता था क्योंकि आज के सिनेमाघर की तरह इनमें काफी और पॉपकॉर्न नहीं मिला करते थे। एयर कंडीशनर नहीं होते थे और प्रोजेक्टर की रोशनी देखकर अलग ही ताजगी मन में आ जाती थी।

पुरानी सिनेमा घरों को पीछे छोड़ते हुए मल्टीप्लेक्स के इस दौर में हम बहुत कुछ भूल चुके हैं। लेकिन 90 और उसके पहले के दर्शक इस चीज को अच्छी तरह से महसूस करते हैं कि 200 ढाई सौ सीट के मल्टीप्लेक्स की फिल्मों में वह आनंद नहीं जो कभी 1000 दर्शकों के बीच फिल्म देखने में आता था। आज हम आपको ऐसे थिएटर के बारे में बताते हैं जो फिल्म मेकर्स और एक्टर्स के बीच लकी चार्म के रूप में प्रसिद्ध था। यहां रिलीज होने वाली हर फिल्म ब्लॉकबटर साबित होती थी।

बॉलीवुड का लकी चार्म Alankar Theatre

हम जिस थिएटर की बात कर रहे हैं वह गिरगांव और ग्रांट रोड के बीच मौजूद अलंकार थिएटर था। यह एक ऐसी जगह थी जहां अलग-अलग इलाके से लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताने आते थे। साल 2006 में इसे बंद कर दिया गया।

इन सितारों के लिए था लकी

अलंकार को अपने पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर काम स्क्रीनिंग और मल्टीप्लेक्स की सुविधा न होने की वजह से काफी घाटा देखना पड़ा। यही वजह थी कि इस थिएटर को बंद कर दिया गया। हालांकि एक समय ऐसा था जब यहां फिल्म रिलीज करने के लिए फिल्म मेकर्स के बीच तनातनी हो जाती थी। प्रकाश मेहरा ने अपनी कहानी फिल्मों को नहीं रिलीज किया था क्योंकि वह इसे लकी मानते थे।

कौन सी थी पहली फिल्म

अलंकार थिएटर 1960 में शुरू किया गया था। बिमल रॉय प्रोडक्शन की फिल्म उसने कहा था यहां रिलीज होने वाली पहली फिल्म थी। इसके बाद राज कपूर की फिल्म जिस देश में गंगा बहती है का प्रीमियम भी नहीं किया गया। इसके बाद जैसे हर तरफ इस सिनेमा घर की चर्चा होने लगी। यह हर आने वाली के लिए मेकर्स की पहली पसंद बन गया। फूल और पत्थर, आन मिलो सजना, जब जब फूल खिले, खून पसीना, चरस जैसी कई फिल्में यहां रिलीज की गई।

अमिताभ ने भी मचाया धमाल

1000 देश की क्षमता वाले इस थिएटर में सिंगल स्क्रीन थी और कई सारे सुविधा भी मौजूद थी। प्रकाश मेहरा और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने इसी सिनेमा घर से लोगों को एंग्री यंग मैन दिया। यहां पर जंजीर, मुकद्दर का सिकंदर लावारिस की गई जो अमिताभ के हिट फिल्मों में से एक है।

जो मुकद्दर का सिकंदर रिलीज की गई थी तब वह 75 हफ्ते तक अलंकार थिएटर में लगी थी। प्रकाश मेहरा इस लकी मानते थे और उनका कहना था रिलीज हुई तो सुपरहिट पक्का होगी। वह 1984 में आई शराबी को भी यही रिलीज करना चाहते थे लेकिन यहां पहले से कुली लगी हुई थी जो अपनी सिल्वर जुबली के करीब थी। जिसकी वजह से उन्हें इस फिल्म को अप्सरा टॉकीज में रिलीज करना पड़ा।

Diksha Bhanupriy
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10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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