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अरुणाचलम मुरुगनाथम बने दुनिया के हीरो! ‘पैडमैन’ को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन

Written by:Bhawna Choubey
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पैडमैन फिल्म से पहचान पाने वाले अरुणाचलम मुरुगनाथम ने महिलाओं की स्वच्छता के लिए किया बड़ा काम, अब उन्हें दुनिया के सबसे बड़े शांति सम्मान के लिए चुना गया, देशभर में गर्व और खुशी की लहर।
अरुणाचलम मुरुगनाथम बने दुनिया के हीरो! ‘पैडमैन’ को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन

कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ सुनने के लिए नहीं होतीं, बल्कि सोच बदलने के लिए होती हैं। ऐसी ही एक कहानी है अरुणाचलम मुरुगनाथम की, जिनकी जिंदगी पर बनी फिल्म ‘पैडमैन’ ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस समय लोगों ने इसे एक फिल्म की तरह देखा, लेकिन अब वही कहानी असल जिंदगी में एक नई ऊंचाई पर पहुंच गई है।

आज अरुणाचलम मुरुगनाथम का नाम दुनिया के सबसे बड़े शांति सम्मान के लिए सामने आया है। यह सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। एक छोटे गांव से निकलकर उन्होंने जो काम किया, उसने लाखों महिलाओं की जिंदगी बदल दी।

संघर्ष से सफलता तक

अरुणाचलम मुरुगनाथम का जीवन शुरू से ही संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने एक दिन देखा कि उनकी पत्नी मासिक धर्म के समय साफ साधनों की जगह गंदे कपड़े इस्तेमाल कर रही थीं। यह बात उन्हें अंदर तक परेशान कर गई।

उन्होंने तय किया कि वह इस समस्या का हल निकालेंगे। लेकिन जब उन्होंने इस पर काम शुरू किया, तो समाज ने उनका मजाक उड़ाया। लोग उन्हें अजीब समझने लगे और उनसे दूरी बनाने लगे। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद प्रयोग किए, मशीन बनाई और सस्ते साधन तैयार किए। यह वही काम था, जिसे करने की हिम्मत बहुत कम लोग जुटा पाते हैं।

महिलाओं के लिए सस्ती सुविधा

अरुणाचलम मुरुगनाथम ने जो मशीन बनाई, उसने महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया। अब गांवों में भी महिलाएं सस्ते और साफ साधनों का उपयोग कर पा रही हैं। पहले कई लड़कियां स्कूल छोड़ देती थीं, क्योंकि उनके पास सुरक्षित साधन नहीं होते थे। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उनकी इस पहल से न सिर्फ महिलाओं की सेहत सुधरी, बल्कि उन्हें रोजगार भी मिला। गांव की महिलाएं खुद इन साधनों को बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

फिल्म ‘पैडमैन’ से बदली समाज की सोच

जब उनकी कहानी पर फिल्म बनी, तो इसने लोगों की सोच को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। पहले मासिक धर्म जैसे विषय पर बात करना भी मुश्किल होता था, लेकिन अब लोग खुलकर इस पर चर्चा करने लगे हैं।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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