राजेश खन्ना की इस कल्ट फिल्म को देखने के लिए दीवाने हो गए थे दर्शक, फिल्ममेकर ने दिखाई थी अपने दोस्त की कहानी

राजेश खन्ना की गिनती अपने जमाने के सुपरस्टार्स में होती है। उन्होंने इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक फिल्में दी है। उनकी एक कहानी ऐसी है जिसे फिल्म मेकर ने अपने दोस्त से प्रेरित होकर बनाया था।
Rajesh Khanna

बॉलीवुड की फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच कितना क्रेज होता है। इस बात का उदाहरण समय समय पर हमारे सामने आता रहता है। कभी किसी फिल्म के कलाकार लोगों की फेवरेट बन जाते हैं तो कभी कोई गाना धूम मचा देता है। कई बार तो फिल्म की स्टोरी ऐसी होती है कि लोग उसे बहुत ही ज्यादा पसंद करने लगते हैं।

बॉलीवुड में आज से नहीं बल्कि बहुत पुराने समय से ऐसे फिल्म मेकर और गीतकार हुए हैं जिन्होंने अपने दर्द को गानों और कहानियों में डाला है। 53 साल पहले एक ऐसी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर आई थी जिसे आज भी पसंद किया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन इसका क्रेज इतना ज्यादा था कि कॉलेज के कॉलेज इसे देखने के लिए खाली हो गए थे। यह फिल्म अपने जमाने के सुपरस्टार राजेश खन्ना की फिल्म थी।

राजेश खन्ना की कल्ट फिल्म (Rajesh Khanna)

राजेश खन्ना की इस फिल्म में हर मुश्किल के समय में भी हंसकर कैसे जीना है यह बताया गया था। इसका क्लाइमैक्स भी काफी शानदार था। ऐसा कहा जाता है की फिल्म मेकर ने अपने जिगरी दोस्त की जिंदगी पर इस फिल्म को बनाया था।

यह फिल्म 12 मार्च 1971 को रिलीज हुई थी जिसका नाम आनंद था। इस फिल्म के डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर आ जाते हैं। इसका डायरेक्शन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था और प्रोड्यूसर एनसी सिप्पी थे।

कैसी थी कहानी

फिल्म की कहानी की बात करें तो इसमें प्यार दोस्ती और जिंदगी को हर पल खुशनुमा से जीने के लम्हे दिखाए गए हैं। स्क्रिप्ट को ऋषिकेश मुखर्जी और गुलजार ने तैयार किया था। डायरेक्टर के जिगरी दोस्त की जिंदगी से प्रेरित कहानी फिल्म में दिखाई गई थी। जितने भी गाने थे वह गीतकार की जिंदगी से जुड़े हुए थे।

नजर आए थे ये कलाकार

फिल्म आनंद में राजेश खन्ना के साथ अमिताभ बच्चन, सुमिता सान्याल और जॉनी वॉकर जैसे सितारों को लीड रोल में देखा गया था। दारा सिंह का छोटा सा कैमरा भी फिल्म में दिखाया गया था। ये बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थी।

मशहूर हुए थे गाने

इस फिल्म की कहानी जितनी लोगों को पसंद आई थी उतने ही इसके गाने भी मशहूर हुए थे। इसमें कोई पांच गाने थे जिनका ड्यूरेशन 16 मिनट का था। कहीं दूर जब दिन ढल जाए, जिंदगी कैसी है पहेली हाय, मैं तेरे लिए ही ये कुछ ऐसे गाने हैं जो कभी ना कभी आज भी लोगों की जुबान पर आ जाते हैं। इस फिल्म को अपनी शानदार कहानी के लिए आठ अवॉर्ड मिले थे।

किस से प्रेरित थी कहानी

इस फिल्म की कहानी को ऋषिकेश मुखर्जी ने राज कपूर से प्रेरित होकर लिखा था। राज कपूर ने बाबू मोशाय बोलते थे जो बंगाली भाषा का शब्द है। बाद में शब्द आनंद फिल्म की पहचान बन गए। 1969 में राज कपूर बहुत बीमार हो गए थे और उसके बाद ऋषिकेश ने जो महसूस किया उसे फिल्म के जरिए दर्शकों के सामने रखा। उसे समय इस फिल्म में एक करोड रुपए का कलेक्शन किया था।

Diksha Bhanupriy
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"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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