एक तरफ जहां मध्यप्रदेश के स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पानी की वजह से हाहाकार मचा हुआ है तो वहीं दूसरी ओर गुजरात की राजधानी गांधीनगर में भी दूषित पानी की वजह से टाइफाइड के मामलों में मरीजों की चिंताजनक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वर्तमान की बात करें तो सिविल अस्पताल में 150 से ज्यादा टाइफाइड के मरीज भर्ती हैं जिनका इलाज चल रहा है। वहीं अन्य 100 से ज्यादा मरीजों के टाइफाइड से संबंधित सैंपल और रिपोर्ट की जांच की गई है।
टाइफाइड फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हो गई हैं। घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है और पीने के पानी की पाइपलाइनों की मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त शासन-प्रशासन भी एक्टिव हो गया है। समस्या की जांच के लिए उन्नत रोबोटिक तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। जल बोर्ड ने वादा किया है कि जल्द से जल्द साफ पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री ने की थी मरीजों से मुलाकात
टाइफाइड के मामले बढ़ने पर राज्य के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने 4 जनवरी 2026 को सिविल अस्पताल में व्यवस्थाओं का जायजा लिया था और मरीजों से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया था कि प्रशासन ने भर्ती मरीजों के इलाज के लिए 22 डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित (SIT) की है। इसके अलावा डिप्टी कलेक्टर सहित अन्य सीनियर ऑफिसर्स को स्थिति को लगातार मॉनिटर करने का आदेश दिया है।
दूषित पानी से फैल रहीं बीमारियों को लेकर अखिलेश यादव का बीजेपी सरकार पर हमला
बता दें कि मध्यप्रदेश के इंदौर और गुजरात के गांधीनगर में दूषित पानी से फैल रहीं बीमारियों को लेकर विपक्ष भाजपा सरकार पर निशाना साध रहा है। एमपी में जहां कांग्रेस मोहन सरकार से इस मामले में जवाब मांग रहा है तो वहीं दूसरी ओर समाजवादी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने गुजरात सरकार पर हमला बोला है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा है कि भाजपा के ‘ट्रिपल इंजन’ के इंदौर के बाद अब ‘ट्रिपल इंजन’ के गांधीनगर (गुजरात की राजधानी) में पीने के दूषित पानी से सैकड़ों लोग बीमार पड़ गये हैं। भाजपा तो ‘नगर पालिका’ संभालने लायक भी नहीं है। प्रदेश और देश तो भाजपा क्या संभालेगी।
सपा प्रमुख ने आगे कहा कि भाजपा जैसा भ्रष्टाचार कभी नहीं हुआ। पानी से छल वही कर सकता है, भ्रष्टाचार की वजह से जिसकी आँख का पानी मर गया हो। उप्र में भी भाजपा के भ्रष्टाचार के बोझ से पानी की टंकियों के गिरने की खबरें लगातार आती रहती हैं। भाजपाई भ्रष्टाचार की वजह से ‘जल से जीवन है!’ कि जगह ‘जल से जीवन को ख़तरा है!’ ये नारा जनता के बीच प्रचलित हो गया है।
इंदौर में तो भाजपाई पुरानी बस्ती का बहाना बना रहे हैं, गुजरात की राजधानी गांधीनगर में तो स्मार्ट सिटी के तहत नई पाइपलाइन बिछाई गयी हैं, वहां अब क्या बहाना बनाएंगे। जनता कह रही है कि अगर यही है ‘गुजरात के विकास का मॉडल’ तो न तो भाजपा चाहिए, न ही उनका विकास का मॉडल। भाजपा जाए तो जीवन बच जाए।
भाजपा के ‘ट्रिपल इंजन’ के इंदौर के बाद अब ‘ट्रिपल इंजन’ के गांधीनगर (गुजरात की राजधानी) में पीने के दूषित पानी से सैकड़ों लोग बीमार पड़ गये हैं।
भाजपा तो ‘नगर पालिका’ संभालने लायक भी नहीं है। प्रदेश और देश तो भाजपा क्या संभालेगी।
भाजपा जैसा भ्रष्टाचार कभी नहीं हुआ। पानी से छल… pic.twitter.com/HOciw4J43i
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 6, 2026





