एसपी की पहल पर शुरू हुआ ‘घर छोड़कर न जाओ बिटिया’ अभियान, गांव-गांव फैला रहे जागरूकता

एसपी की पहल पर शुरू हुआ ‘घर छोड़कर न जाओ बिटिया’ अभियान, गांव-गांव फैला रहे जागरूकता

गुना, गोविन्द जोगी| मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) के गुना (Guna) जिले में पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह (SP Rajesh Kumar Singh) की मुहीम चर्चा में है| जिले में पांच सालों में लगभग 110 नाबालिग बालक-बालिकाएं गुम हो चुके हैं, जिनके मामले विभिन्ना थानों में दर्ज होकर लंबित हैं। ऐसी स्थिति में अब पुलिस अधीक्षक ने नई पहल करते हुए ‘घर छोड़कर न जाओ बिटिया’  अभियान की शुरुआत की है|

अभियान के तहत थाना पुलिस गांवों में जाकर नाबालिग बालक-बालिकाओं और ग्रामीणों के साथ संवाद कर रही है, जिसमें बताया जा रहा है कि घर छोड़ने के किस तरह के दुष्परिणाम सामने आते हैं। इस जागरूकता अभियान में महिला एवं बाल विकास विभाग एवं अन्य कर्मचारी भी पुलिस के साथ लोगों को जागरूक कर रहे हैं|

इसी क्रम में गुना शहर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से परिचर्चा और जागरूकता का कार्यक्रम एकीकृत बाल विकास परियोजना ऑफिस गुना में आयोजित किया गे| इसमें आरबी गोयल, सहायक संचालक महिला बाल विकास गुना, गिरजा जाटव परियोजना अधिकारी शहरी क्षेत्र गुना चाइल्ड लाइन व जेएबी शाखा से उप निरीक्षक रीता कपूर व विशेष किशोर पुलिस इकाई से प्रधान आरक्षक भूपेंद्र सिंह सेंगर शामिल हुए|

अधिकारियों द्वारा बताया गया कि अधिकतर मामलों में नाबालिग बालिकाओं का अपने परिचित, संबंधी, रिश्तेदार आदि के साथ जाने की कहानी सामने आती है। कई लोग उन्हें गुमराह कर ले जाते हैं। उक्त मामलों का निराकरण करने के साथ ही आगे कोई नाबालिग बालक-बालिका गलती न करे इसलिए उक्त अभियान चलाया गया है। जिसमे गांव गांव में जाकर ग्रामीणों से संवाद किया जाकर जागरूक किया जा रहा है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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