सरपंच प्रत्याशी के पति का शव पेड़ पर लटका मिला, चुनावी रंजिश में हत्या का आरोप

सरपंच प्रत्याशी के पति का शव पेड़ पर लटका मिला, चुनावी रंजिश में हत्या का आरोप

गुना, संदीप दीक्षित। गुना जिले की एक पंचायत से चुनाव लड़ रही सरपंच पद की प्रत्याशी के पति का शव (dead body of sarpanch candidate’s husband) पेड़ पर लटका मिलने  गांव में सनसनी फ़ैल गई। सूचना पर घटना स्थल पर पहुंची पुलिस ने शव को पेड़ से उतारकर जांच पड़ताल के बाद पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया , मृतक के परिजनों ने इसे चुनावी रंजिश में की गई हत्या (Murder) बताया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार गुना जिले के टकनेरा पंचायत में चुनाव लड़ रही सरपंच प्रत्याशी बीना बाई यादव के पति गोविन्द सिंह यादव का शव गांव में ही एक पेड़ से लटका मिला।  मामला गुना जनपद और म्याना थाना क्षेत्र का है। मृतक के साले ने बताया कि उसकी बहन बीना बाई यादव टकनेरा पंचायत से सरपंच का चुनाव लड़ रही हैं।

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बीती रात उनके जीजा गोविन्द सिंह घर पर सो रहे थे, रात करीब 2 बजे अज्ञात लोग उन्हें बुलाकर ले गए थे। इसके बाद सुबह गांव के ही एक पेड़ पर उनका शव लटका हुआ मिला है। घटना की सूचना तुरंत मिलने पर म्याना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए गुना जिला अस्पताल भेजा गया है।

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मृतक के साले ने इसे चुनावी रंजिश में हत्या करना बताया है।  उसने गांव के ही कुछ लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है। उधर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच में ले लिया है।  आपको बता दें कि इससे पहले गोविंद सिंह यादव के छोटे भाई रामकुमार यादव यहां से सरपंच थे। सीट आरक्षित होने के बाद अब गोविंद की पत्नी सरपंच का चुनाव लड़ रही हैं।

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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