स्व सहायता समूह की महिलाएं बना रही मास्क, आजीविका अर्जन के साथ कर रही समाजसेवा

स्व सहायता समूह की महिलाएं बना रही मास्क, आजीविका अर्जन के साथ कर रही समाजसेवा

गुना/ विजय कुमार जोगी

कोरोना वायरस से लड़ने के लिये केंद्र और प्रदेश सरकार अपने अपने स्तर से काबू पाने में लगी है। शासन प्रशासन के अलावा स्वयंसेवी संस्थाएं और कई अन्य लोग भी अपने स्तर पर कोशिशें कर रहे हैं कि इस काम में कुछ योगदान दे सकें। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गृह नगर राघौगड़ में स्व सहायता समूह की महिलाएं घर बैठे आय का साधन और समाजसेवा दोनों काम एक साथ कर रही हैं। ये महिलाएं घर बैठे महिला एवं बाल विकास विभाग की मदद से मास्क बनाकर अस्पतालों में और प्राइवेट संस्थानों में दे रही हैं। बता दें कि एक महिला प्रतिदिन 100 से अधिक मास्क बना लेती है जिससे उन्हें 500 से 600 रूपये की आमदनी प्रतिदिन हो जाती है।

सहायता समूह की करीब 8 महिलाओं में से हर महिला को प्रतिदिन 500 से 600 की आमदनी मास्क बनाकर हो रही है। समूह की सभी महिलाएं इस काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा भी ले रही हैं और सोशल डिस्टेंस का पूरा पालन भी कर रही हैं। सिलाई मशीन के द्वारा लोगों के लिए मास्क घर पर बना कर ये पैसे भी कमा रही हैं और सरकार की मदद भी कर रही हैं। महिला बाल विकास विभाग की कोऑर्डिनेटर नीलिमा विजयवर्गीय ने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमने यह कदम उठाया है और इसमें हमें सरकार द्वारा मदद भी मिल रही है और आगे भी महिलाएं इस काम को करने में ज्यादा से ज्यादा रुचि दिखाएं यही हमारा संकल्प है। हम महिलाओं को मासिक बनाने की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं और जागरूक भी कर रहे हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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