
Gwalior News : ग्वालियर पुलिस ने बदमाशों की एक ऐसी साजिश का पर्दाफाश किया है जो खुद को गोली मारकर या फिर गोली मरवाकर दूसरे को फंसाने का प्रयास कर रहे थे जिससे उनके खिलाफ कोर्ट में चल रहे मामलों में गवाही देने वालों पर पुलिस केस बन जाये, या फिर वो बयान बदल लें और राजीनामा कर लें, पुलिस ने साजिश का खुलासा कर दो अलग अलग घटनाओं के आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
एसपी धर्मवीर सिंह यादव ने आज मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि 9 जुलाई को मनीष बाथम उर्फ एटीएम पुत्र स्व. भवानी प्रसाद बाथम उम्र 29 वर्ष निवासी वार्ड नम्बर 05 सिद्धपुरा मिहोना जिला भिण्ड को गोली लगने से इलाज के उसके साथी जोनी द्वारा जेएएच ग्वालियर में भर्ती कराया गया था। 11जुलाई को हजीरा थाना पुलिस द्वारा हॉस्पिटल पहुंचकर घायल मनीष बाथम के बयान लिए गए तो मनीष बाथम द्वारा बताया गया कि रोहन प्रजापति ने मुझे गोली मारी है और उसके साथ रोहन का पिता भी था और रोहन व उसका पिता मोटर साइकिल क्रमांक एमपी-07-MV-1932 पर थे।
घायल के बयान सुनकर पुलिस को हुआ संदेह
गोली की घटना को पुलिस ने गंभीरता से लिया, घायल मनीष बाथम के बयान की बारीकी से पड़ताल करने के लिए घटना स्थल व संदेहियों के घर के आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखे, लेकिन पुलिस ने रोहन प्रजापति व मुकेश प्रजापति से पूछताछ की उन्होंने बताया कि जिस तारीख और समय की घटना बताई गई है उस रात को वह लोग घर पर ही थे। पुलिस को जब शक हुआ और जांच आगे बढ़ाई तो मालूम चला कि पूर्व में मुकेश प्रजापति को 2 नवम्बर 2023 को लाखन राठौर निवासी कोटेश्वर द्वारा रुपयों के लेनेदेन पर से विवाद होने पर गोली मार दी थी जिसमें आरोपी लाखन सिंह राठौर वर्तमान में जेल में बंद है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उस केस में राजीनामा करने, गवाही बदलने के लिये आरोपी लाखन राठौर के भाई नारायण सिंह राठौर द्वारा मुकेश प्रजापति डराया व धमकाया जा रहा था। पुलिस द्वारा जाँच के दौरान घटना संदेहास्पद लगने से घायल मनीष बाथम को इलाज हेतु हॉस्पीटल में भर्ती कराने वाले उसके साथी जोनी की तलाश की गई तो वह अस्पताल से फरार हो गया और घायल मनीष बार-बार अपने कथन बदलने लगा।
ऐसे बनाई थी योजना
लेकिन जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो घायल मनीष बाथम ने बताया कि नारायण सिंह राठौर निवासी कोटेश्वर मेरा दोस्त है और उसने बताया था कि मुकेश प्रजापति की रिपोर्ट पर 307 केस में उसका भाई लाखन सिंह राठौर जेल में बंद है और मुकेश राजीनामा नहीं कर रहा है इसलिए उसके ऊपर 307 की झूठी रिपोर्ट लिखवानी है, रिपोर्ट लिखवाने के बाद तुम्हे दो लाख रुपये दे दूंगा। घटना के लिए कट्टा व राउण्ड की व्यवस्था प्रदीप राठौर करेगा एवं गवाही के लिए जोनी को तैयार किया है व गोली मारने के लिये ईशू पाण्डे को तैयार किया गया। तुम अपने ऊपर गोली मरवा लेना और रिपोर्ट लिखाते समय मुकेश प्रजापति व उसके लड़के रोहन प्रजापति का नाम पुलिस को लिखवा देना यह योजना नारायण सिंह राठौर ने तानसेन नगर में मेरे व प्रदीप राठौर, जोनी व ईशू उर्फ अमन के साथ बैठकर बनाई थी।
प्लानिंग के तहत एकांत में ले जाकर मार दी गोली, फिर भर्ती करा दिया
मनीष ने बताया कि योजना के तहत ये लोग मुझे अपने साथ ले गए मछली मण्डी के पास सीमेंट की दुकान पर मुकेश प्रजापति व रोहन प्रजापति की पहचान कराई। ईशू उर्फ अमन पाण्डे ने मुझे गोली मारी। जोनी गवाह के तौर पर ईशू के साथ स्प्लेंडर मोटरसाइकिल से आए थे। कट्टा व राउण्ड की व्यवस्था प्रदीप राठौर निवासी ग्राम हरनाथपुरा जिला द्वारा की गई थी। 09 जुलाई की रात करीब 11:30 बजे मैं, जोनी व ईशू उर्फ अमन स्प्लेंडर मोटर साइकिल से लेकर पीएचई कालोनी पर आए सूनसान व अंधेरा स्थान देखकर ईशू ने अपने पास लिए कट्टे से पैर में गोली मारने के बजाय जानबूझकर मेरे पेट में गोली मार दी जिससे मैं बेहोश हो गया था। इन लोगों ने ही मुझे अस्पताल में भर्ती कराया था। पुलिस की जाँच में सामने आया कि पाया गया है कि नारायण सिंह राठौर ने अपने भाई के केस में राजीनामा करने के लिए अपने साथियों के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा और मनीष को पैसों का लालच देकर गोली मरवा दी, पुलिस ने मनीष को गिरफ्तार कर लिया है शेष चारों आरोपियों की तलाश कर रही है। नारायण सिंह पर 2 आपराध पहले से हैं अन्य बदमाशों का रिकॉर्ड तलाशा जा रहा है।
गवाह पर दबाव बनाने खुद ही मार ली गोली
इसी तरह महाराज पुरा थाना क्षेत्र में भी एक गन शॉट का मामला झूठा निकला, एसपी ने बताया कि 13 जुलाई को महाराजपुरा पुलिस को कृष्णा भदौरिया पुत्र मनोज भदौरिया के दायें पैर में गोली लगने से इलाज हेतु महेश्वर हॉस्पिटल में भर्ती होने के संबंध में सूचना प्राप्त हुई। सूचना पर से महाराजपुरा पुलिस द्वारा घायल कृष्णा भदौरिया से घटना के संबंध में पूछताछ की गई तो उसने बताया कि दिनांक 12 जुलाई की शाम को मैं अपने दोस्त अजय वर्मा की मोटरसाईकिल से प्रहरी कॉम्पलेक्स के पीछे स्लेप पर बैठ गया तभी मेरे दोस्त अंकुश राणा और जतिन सविता भी आ गये और कुछ देर बाद बिना नम्बर की काले रंग की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल से तीन लोग मुंह बांधे हुये आये और एक व्यक्ति ने कट्टा निकालकर फायर कर दिया जिससे गोली मेरे दाहिने पैर के पंजे में लगी।
पुलिस को बरगलाने की कोशिश की
घायल कृष्णा भदौरिया ने अपने कथनों में किसी से कोई दुश्मनी नहीं होना बताया, लेकिन उसके तुरंत बाद फिर बयान दिये जिसमें कृष्णा राठौर और लवकुश गुर्जर पर संदेह होना बताया। घायल कृष्णा भदौरिया ने बताया कि दो दिन पूर्व मेरे दोस्त प्रियांशु सिकरवार का कृष्णा राठौर से झगड़ा हो गया था तो कृष्णा राठौर ने मेरे और प्रियांशु के विरुद्ध थाना महाराजपुरा में एफआईआर दर्ज कराई थी। लवकुश गुर्जर, कृष्णा राठौर का दोस्त है इस कारण मुझे इन दोनों पर संदेह है। पूछताछ में बार-बार कथन बदलने पर महाराजपुरा पुलिस को घटना की संदेहास्पद लगी। जिसकी सूचना थाना प्रभारी महाराजपुरा द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।
जिन पर आरोप लगाया वो घर पर ही थे
घटना पर संदेह होने के बाद पुलिस ने बारीकी से जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस टीम द्वारा घटना के चश्मदीद साक्षी अजय वर्मा, जतिन सविता और अकुंश राणा से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि प्रहरी कॉम्पलेक्स पर जब हम लोग बैठे थे तभी कृष्णा भदौरिया कह रहा था कि मुझ पर केस दर्ज हो गया है मुझे दिक्कत है मैं मर जाऊंगा और रोने लगा और उसके बाद उसने खुद कट्टा निकालकर अपने पैर में गोली मार ली और हमसे बोला कि कोई पूछे तो बता देना कि कोई 03 अज्ञात व्यक्ति गोली मार गये हैं जो मुंह बांधे हुये थे तुम लोग ऐसे ही बयान देना जो कुछ होगा मैं देख लूंगा। पूछताछ में कट्टा अंकुश राणा ने घटना के बाद अपने पास छुपाना स्वीकार किया।
चाहते थे गवाह कोर्ट में बयान न दे राजीनामा कर ले
महाराजपुरा पुलिस द्वारा पवन राठौर और कृष्णा राठौर से पूछताछ कि गई तो उसने बताया कि दिनांक 11 जुलाई को रात 12:26 बजे प्रियांशु सिकरवार और कृष्णा भदौरिया हमारे घर पर आये और घर का गेट बजाने लगे तथा माँ बहन की गन्दी-गन्दी गालियां देने लगे और घर के बाहर खड़ी अर्टिगा गाड़ी के आगे पीछे के कांच तोड़ दिये तथा जान से मारने की धमकी दी थी। जिस पर से हमने उनके खिलाफ थाना महाराजपुरा थाने में मामला पंजीबद्ध कराया था।
प्रकरण पंजीबद्ध कराने पर कृष्णा भदौरिया हमसे रंजिश बनाये हुये है और हमें झूठे केस में फंसाने का षड्यंत्र रच रहा है। 13 जुलाई की सुबह मुझे पता चला कि कृष्णा भदौरिया ने प्रहरी कॉम्पलेक्स पर दिनांक 12 जुलाई की रात को अपने पैर में गोली मार ली है और कृष्णा राठौर के विरूद्ध झूठा अपराध पंजीबद्ध कराना चाह रहा है। जबकि हम दोनों दिनांक 12 जुलाई के शाम करीब 07:00 बजे से अपने घर पर ही थे। हमारे द्वारा कृष्णा भदौरिया आदि के विरूद्ध पंजीबद्ध कराये गये अपराध में दबाब बनाने के लिये हमारे विरुद्ध झूठी एफआईआर कराने के उद्देश्य से कृष्णा भदौरिया ने स्वंय कट्टे से अपने पैर में गोली मार ली है।
पुलिस टीम द्वारा जॉच व तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पाया कि कृष्णा भदौरिया द्वारा कृष्णा राठौर और लवकुश गुर्जर को झूठा प्रकरण में फंसाने हेतु साक्ष्य गढ़ा गया है और स्वयं को कट्टे से गोली मारकर चोट पहुंचाई गई हैं एवं अंकुश राणा के द्वारा भी उसका सहयोग कर कट्टे को छुपाने का अपराध कारित किया है। जिस पर से महाराजपुरा पुलिस द्वारा आरोपीगण कृष्णा भदौरिया एव अंकुश राणा के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है है पुलिस ने बताया कि कृष्णा भदौरिया द्वारा बिरला नगर पुल के पास एक कैफे में गोली चलाई थी जिस पर भी मामला दर्ज हुआ हुआ था, और आरोपी गिरफ्तार हुआ था।
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ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट
पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

