Gwalior News : नए कानून BNS के तहत FIR दर्ज नहीं करना थाना प्रभारी को पड़ा भारी, SP ने लाइन अटैच किया

जब मामला वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पहुंचा तो एसपी धर्मवीर सिंह ने एडिशनल एसपी के प्रतिवेदन पर थाना प्रभारी महेंद्र प्रजापति को लाइन अटैच कर दिया।
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Gwalior News : देश में 1 जुलाई से नया कानून लागू हो गया है, अब पुलिस द्वारा दर्ज किया जाने वाला मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत ही दर्ज किया जायेगा लेकिन ग्वालियर जिले के एक थाना प्रभारी ने गलती करते हुए मामला पुराने कानून के तहत ही दर्ज कर लिया, मामला सामने आने के बाद एसपी ने थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया है।

मामला ग्वालियर जिले के ग्रामीण इलाके के करहिया थाने का है, दर असल पिछले दिनों थाने पहुंचकर युवती ने उसके साथ हुए दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई, शिकायत के तहत युवती की भाभी ने उसे कोल्ड ड्रिंक्स में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया उसके बाद भाभी के भाई ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसके बुआ के लड़के ने आपत्तिजनक वीडियो बनाई और उसे वायरल करने की धमकी देकर कई चुप करा दिया, कुछ महीने पहले युवती की शादी हो गई तो उन लोगों ने आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।

BNS के तहत जीरो पर करनी थी FIR, थाना प्रभारी ने IPC की धाराओं में दर्ज किया मुकदमा  

युवती की शिकायत मिलने के बाद करहिया थाना प्रभारी (उप निरीक्षक) महेंद्र प्रजापति ने धारा 376,450, 342,506, 34 IPC और 67 IT एक्ट के तहत 11 जुलाई को मामला दर्ज कर लिया,  अब विशेष बात ये है कि फरियादी युवती ने इसमें आरोपी विजय शर्मा, निवासी धौलपुर और श्रीमती शांति शर्मा निवासी आगरा का नाम लिखाया और घटना स्थल थाना सदर आगरा का लिखाया।

एडिशनल एसपी के प्रतिवेदन पर एसपी ने थाना प्रभारी को किया लाइन अटैच  

अब नए कानून के मुताबिक यदि घटना स्थल दूसरे थाना क्षेत्र का है तो जीरो पर कायमी की जानी है लेकिन थाना प्रभारी महेंद्र प्रजापति ने पुराने कानून के तहत ही मामला दर्ज कर लिया और वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी, जब मामला वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पहुंचा तो एसपी धर्मवीर सिंह ने एडिशनल एसपी के प्रतिवेदन पर थाना प्रभारी महेंद्र प्रजापति को लाइन अटैच कर दिया।

ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट 

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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