Gwalior News : सरपंच विक्रम रावत हत्याकांड के आरोपियों पर 5000-5000 रुपये का इनाम घोषित

Gwalior News : सरपंच विक्रम रावत हत्याकांड के आरोपियों पर 5000-5000 रुपये का इनाम घोषित

Gwalior News : ग्वालियर जिले बनहेरी पंचायत के सरपंच विक्रम रावत की हत्या के आरोपी 24 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी पुलिस पकड़ से दूर हैं, पुलिस उनकी तलाश कर रही है लेकिन अब तक उसे कोई सुराग नहीं मिल पाया है, एसपी ने हालात को देखते ही आरोपियों पर 5000-5000 रुपये का इनाम घोषित कर दिया है।

सोमवार को बदमाशों ने सरपंच की गोली मारकर की थी हत्या  

ग्वालियर के गांधी नगर में कल सोमवार सुबह बाइक पर आये पांच नकाबपोश बदमाशों ने बनहेरी के सरपंच विक्रम रावत को उस समय गोलियों से भून दिया था जब वो अपने चचेरे भाई की हत्या के केस के सिलसिले में वकील प्रशांत शर्मा से मिलने गए थे , विक्रम ने कार से उतरकर पीछे का गेट खोलकर फ़ाइल निकाली थी तभी उनपर बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी  जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

परिजनों ने एसपी ऑफिस का घेराव किया, आरोपियों के घरों पर लगाई आग 

घटना के बाद शहर से लेकर विक्रम के गांव बनहेरी में तनाव हो गया, परिजनों ने विक्रम के शव के साथ एसपी ऑफिस का घेराव किया , उधर कुछ अन्य परिजनों ने गांव में आरोपियों के घर पर आगजनी की, सूचना मिलते ही एसपी राजेश सिंह चंदेल सहित भारी पुलिस फ़ोर्स गाँव में तैनात कर दिया गया और हालात को काबू किया गया।

पुलिस ने आरोपियों पर घोषित किया 5000- 5000 रुपये का इनाम 

पुलिस ने घटना के बाद चार नामजद  और एक अज्ञात आरोपी के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया और उनकी तलाश शुरू की, लेकिन पुलिस अब तक आरोपियों का पता नहीं लगा पाई है, घटना की गंभीरता को समझते हुए एसपी ने आरोपियों के खिलाफ 5000 – 5000 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है, परिजनों के मुताबिक आरोपियों में शामिल मुकेश रावत इंदौर में पीएफ कमिश्नर हैं।

आईजी बोले जल्दी होगी आरोपियों की गिरफ़्तारी 

ग्वालियर आईजी(ADGP) डी श्रीनिवास वर्मा ने बताया कि बनहेरी गांव में अभी भी पुलिस फ़ोर्स तैनात है गांव में अभी शांति है,आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस पार्टियां अलग अलग जगह भेजी गई हैं, जल्दी ही उनकी गिरफ़्तारी कर ली जाएगी।

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ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट 

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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