सब्जी विक्रेता महिला से लूट में शामिल एक आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने निकाला जुलूस

सब्जी विक्रेता महिला से लूट में शामिल एक आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने निकाला जुलूस

ग्वालियर।अतुल सक्सेना| छह दिन पूर्व एक सब्जी विक्रेता महिला को लूटने वाले तीन बदमाशों में से एक को पड़ाव थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर उसका सड़क पर जुलूस निकाला । पुलिस आरोपी को पैदल सड़क पर चलाकर न्यायालय तक ले गई। पुलिस का दावा है कि जल्दी ही शेष दोनों आरोपी भी गिरफ्तार किये जायेंगे।

लॉक डाउन में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए शहर के सबसे व्यस्त चौराहे फूलबाग के पास एक सब्जी विक्रेता महिला को लूटने वाले तीन बदमाशों में से एक प्रदीप जाटव को पड़ाव पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। टी आई ज्ञानेंद्र सिंह के मुताबिक घटना वाले दिन से ही इस लूट को एसपी के निर्देश पर चुनौती के रूप में लिया गया था । थाने का स्टाफ तेजी से आरोपियों की तलाश कर रहा था। मुखबिर से एक आरोपी के छिपे होने की सूचना मिली जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। बबीती रात आरोपी की गिरफ्तारी के बाद आज पुलिस आरोपी प्रदीप जाटव को जुलूस निकालते हुए न्यायालय ले गई। पुलिस का कहना है कि शेष दोनों आरोपियों के घर भी दबिश दी गई लेकिन वे नहीं मिले। लेकिन जल्दी ही वे भी गिरफ्तार कर लिए जायेंगे। आरोपी का जुलूस निकालने के सवाल पर पुलिस ने कहा कि थाने की गाड़ी खराब हो गई थी और समय पर पहुंचना था इसलिए पैदल ले जाना पड़ा जुलूस नहीं निकाला। गौरतलब है कि 14 अप्रैल को फूलबाग चौराहे के पास मारकंडेश्वर मंदिर के पास मोटर साइकिल सवार तीन बदमाशों ने सब्जी विक्रेता धन्ती बाई से 300 रुपये की सब्जी खरीदी थी और 2000 रुपये का नोट दिया था महिला खुल्ले पैसे लौटाने लगी तभी बदमाश उसकी रुपयों से भरी थैली सब्जी और 2000 रुपये का नोट लूट कर फरार हो गए थे।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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