जेनेरिक की बजाय डॉक्टर लिख रहे ब्रांडेड दवा, हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

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ग्वालियर, अतुल सक्सेना| हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ (high court gwalior bench) ने जेनेरिक दवाओं (generic medicine ) को अपने प्रिसक्रिप्शन में नहीं लिखने से संबंधित एक जनहित याचिका (public interest litigation) में केंद्र सरकार और राज्य सरकार सहित मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि इस मामले में 4 सप्ताह में सभी पक्षकार अपना जवाब पेश करें।

जनहित याचिका विभोर कुमार साहू अधिवक्ता द्वारा दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इण्डिया के द्वारा इंडियन मेडिकल काउंसिल प्रोफेशनल कंडक्ट ऐटीकेट एण्ड इंथिक्स रेग्यूलेशन 2002 में नियम 1.5 जोड़कर गजट 8 अक्टूबर 2016 से लागू कर यह नियम बनाया गया कि सभी चिकित्सक अपना दवाई का पर्चा बनाते समय सिर्फ जेनेरिक मेडिसिन लिखेंगे। मतलब चिकित्सक पर्चे में किसी भी दवा का ब्रॅाण्ड नाम नहीं लिखेंगे। उसके स्थान पर केवल दवाई का फॉर्मूला लिखा जाएगा। यह कानून तो बना दिया गया, लेकिन यह पूरी तरह से अमल में नहीं लाया जा रहा है| डॉक्टर हमेशा ब्रांडेड कंपनियों के प्रोडक्ट लिखते रहे|

विभोर कुमार साहू ने बताया कि इससे यह फायदा होगा कि मरीजों को चिकित्सक के द्वारा लिखी गई दवा जेनेरिक फॉर्म में मेडिकल से उपलब्ध होगी, जोकि अपने ब्राण्ड मेडिसिन की तुलना में लगभग 100 से 200 प्रतिशत सस्ती होगी। सबसे ज्यादा कैंसर और गंभीर रोगियों के इलाज में लाखों रुपए की दवाओं को जेनेरिक दवाओं के रूप में सिर्फ हजारों रुपए में खरीदा जा सकता है| अधिवक्ता विभोर साहू ने एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी.इस मामले में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय, ड्रग्स कंट्रोलर स्टेट गवर्नमेंट व हेल्थ डिपार्टमेंट सहित आठ को पक्षकार बनाया गया है|

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