जयभान सिंह पवैया ने की गोवर्धन पूजा,बोले- हिन्दुस्तान एक मात्र ऐसा देश जहाँ प्रकृति में परमेश्वर के दर्शन होते हैं

भारत एक मात्र ऐसा देश है जहां प्रकृति में परमेश्वर का दर्शन किया जाता है, गंगा स्पर्श के लिए करोड़ों लोग प्रयागराज जाना जो इस बात का प्रतीक है,
Jaibhan Singh Pawaiya performed Govardhan Puja

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया के निवास पर बीते 15 सालों से जरी सामूहिक गोवर्धन पूजा का क्रम इस साल भी जारी रहा, इसी क्रम में आज बुधवार को भी बड़े स्तर पर गोवर्धन पूजा का आयोजन किया गया।

गोवर्धन पूजा कार्यक्रम में RSS से यशवंत इंदापुरकर, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्नस सिंह तोमर, कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाहा विशेष रूप से शामिल हुए और गोवर्धन महाराज की सामूहिक पूजा अर्चना की, कार्यक्रम में साधु संत भी आशीर्वाद देने मौजूद रहे। 

गोवर्धन जी महाराज भगवान श्री कृष्ण के साक्षात विग्रह

मीडिया से बात करते हुए पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि भारत एक मात्र ऐसा देश है जहां प्रकृति में परमेश्वर का दर्शन किया जाता है, गंगा स्पर्श के लिए करोड़ों लोग प्रयागराज जाना जो इस बात का प्रतीक है, गोवर्धन जी महाराज भगवान श्री कृष्ण के साक्षात विग्रह है क्योंकि परमत्मा ने उनको अपनी उंगली पर उठाया था।

गोवर्धन की एकांत पूजा को निषेध कहा गया है इसलिए ये सामूहिक होती है

पवैया ने कहा गोवर्धन की परंपरा जो भारत में है उस एकांत पूजा को निषेध कहा गया है इसलिए ये सामूहिक होती है और पूरा समाज एकसाथ मिलकर भगवान गोवर्धन के प्रति कृतज्ञ  होता है क्योंकि द्वापर काल से गौवंश का जो वरदान हमें मिला वो गिर्राज की कृपा के कारण हम सनातनी लोग मानते हैं।

पहली रोटी गौ माता के लिए निकालें 

उन्होंने कहा कि हम सब आज गोवर्धन जी से एक ही प्रार्थना करें कि भारत की धरती गोवंश से समृद्ध हो, भारत दूध और नदियों वाला देश बने, इस मंडप में खड़े सभी लोग एक ही संकल्प लें कि हम पहली रोटी गौ माता के लिए निकालें तो धरती की पूरी कृपा हमारे ऊपर बनी रहेगी। और जो लोग होटल से खाना मांगते हैं वे लोग पूजा की गुल्लक में 5-10 रुपए गौ माता के लिए निकल कर रख दें तो समझ ली हमने गोवर्धन की पूजा कर ली है।

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Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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