जयभान सिंह पवैया बोले- जब बच्चे महानायकों की भूमिका निभाते हैं तो वो चरित्र उनके जीवन में उतर जाता है

संस्कार भारती ग्वालियर और वंदे मातरम समूह द्वारा व्यक्तित्व विकास शिविर एवं नाट्य कार्यशाला का आयोजन
जयभान सिंह पवैया बोले- जब बच्चे महानायकों की भूमिका निभाते हैं तो वो चरित्र उनके जीवन में उतर जाता है

संस्कार भारती ग्वालियर एवं वंदे मातरम समूह द्वारा आयोजित व्यक्तित्व विकास शिविर एवं नाट्य कार्यशाला कला दर्शन 2026 के पुरस्कार वितरण समारोह का आज रविवार को आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया थे।

मुख्य अतिथि पवैया ने इस अवसर पर श्रेष्ठ कला गुरुओं और कलाकारों को पुरस्कृत किया, उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई की याद में आयोजित बलिदान मेले में आयोजित महानाट्य का स्मरण करते हुए कहा यह महानाट्य नई पीढी के लिए मार्ग प्रशस्त करने में सहायक होगा। जब ये बच्चे महा नायकों के पात्र की भूमिका अदा करते हैं तो वह चरित्र उनके जीवन में उतरने लगता है। पवैया ने कहा बिना क्रांतिकारियों के बलिदान व संघर्ष के हम स्वतंत्रता का सपना नहीं देख सकते।

सूरमा कभी लकीर पर नहीं चलते: जयभान सिंह पवैया

उन्होंने कहा लकीर पर अंधे चलते हैं सूरमा कभी लकीर पर नहीं चलते वो अपनी राह खुद तय करते हैं। यह बलिदान मेला इसका बेहतरीन उदाहरण है। इसके माध्यम से कई छोटी बच्चियों ने लक्ष्मीबाई के किरदार को समझा व जिया। किसी भी अच्छे कार्य को ईश्वर स्वयं संचालित करते हैं। इस मेले की सफलता का पूरा श्रेय बाल कलाकारों को जाता है।

हम अपनी संस्कृति और विरासत के साथ समझौता नहीं करेंगे: जयभान सिंह पवैया

पवैया ने कहा स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम का पूरा गायन किया गया, इससे हमने पूरी दुनिया की बता दिया कि हम अपनी संस्कृति और विरासत के साथ समझौता नहीं करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने की। उन्होंने कहा कि संस्कार भारती एवं वंदे मातरम् समूह द्वारा संस्कृति, कला और साहित्य के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किया जा रहा है। इन संस्थाओं से जुड़े हुए कलाकार विभिन्न नाट्य एवं प्रस्तुति के माध्यम से युवाओं में देशभक्ति और संस्कृति के विकास का कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिभागियों को मंच से पुरस्कृत किया गया। साथ ही युवा कलाकारों ने व्यक्तित्व विकास शिविर,खूब लड़ी मर्दानी और वीर योद्धा महाराणा प्रताप महा नाट्य के संबंध में अपने अनुभव साझा किए।

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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