रेलवे गार्ड के अपहरण के आरोपियों को आजीवन कारावास, मांगी थी 90 लाख की फिरौती

रेलवे गार्ड के अपहरण के आरोपियों को आजीवन कारावास, मांगी थी 90 लाख की फिरौती

ग्वालियर, अतुल सक्सेना।  ग्वालियर के जिला एवं सत्र न्यायालय ( District and Sessions Court of Gwalior) ने रेलवे गार्ड के अपहरण एवं फिरौती के एक मामले में तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामला छह साल पुराना है।  अपहर्ता द्वारा एक आरोपी को नहीं पहचानने कारण न्यायालय ने उसे बरी कर दिया।

जानकारी के अनुसार ग्वालियर के सिथौली रेलवे स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी से रेलवे गार्ड का अपहरण कर गार्ड के परिजनों से 90 लाख की फिरौती की मांगने के मामले में जिला सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। मामला 12 मार्च 2016 का है।

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स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी के गार्ड वेदराम  का 4 बदमाशों ने अपहरण कर लिया था, ग्वालियर जीआरपी थाने ने वेदराम की गुमशुदगी दर्ज कर ली लेकिन अगले ही दिन उन्हें बदमाशों का फोन कॉल आया। बदमाशों ने वेदराम की रिहाई के बदले परिजनों से 90 लाख रुपये की फिरौती मांगी।

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फिरौती के लिए फोन कॉल आने के बाद वेदराम के बेटे मनोज ने जीआरपी को सूचना दी, पुलिस ने गुमशुदगी को अपरहरण में बदला और आरोपियों की तलाश शुरू की। फिरौती के लिए आये फोन कॉल की मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने सर्चिंग शुरू की और आरोन के जंगल में एक शॉर्ट एनकाउंटर में वेदराम को बदमाशों के चंगुल से मुक्त करा लिया और 4 बदमाशों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।

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पुलिस ने इस घटना में शामिल रोशन बघेल, रामवीर बघेल,  करीना पाल और सरदार बघेल को गिरफ्तार किया था लेकिन जब पुलिस ने गिरफ्तार हुए आरोपियों की पहचान कराई तो पीड़ित ने इनमें से एक आरोपी सरदार बघेल को पहचानने से इंकार कर दिया इसलिए न्यायालय ने उसे इस केस से बरी कर दिया जबकि शेष तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए दो-दो हजार का अर्थदंड भी लगाया ।

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Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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