तोते के बिछड़ने से परिवार बेचैन, रखा 50 हजार रुपये का इनाम, तलाश के लिए शहर भर में हो रही ई रिक्शा से मुनादी

मुनादी वाले पोस्टर पर परिवार ने लोगों नेतोते की पहचान संबंधी विशेष जानकारी भी सार्वजनिक की है, उनके अनुसार तोते का रंग हरा है और उसके सिर पर ग्रे तथा लाल रंग का तिलकनुमा निशान बना हुआ है।
Parrot flew away 50,000 reward

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मध्य प्रदेश के ग्वालियर में इंसान और पक्षी के बीच के प्रेम का एक ऐसा उदाहरण सामने आया है जो चर्चा का विषय बना हुआ है, एक परिवार का पालतू तोता जिसे वे प्यार से शाकुंतला कहकर बुलाते थे अचानक उड़ गया.. उसके जाने के बाद से परिवार के लोग बेचैन हैं, घर में शाकुंतला की आवाज सुनाई नहीं देने से किसी का मन नहीं लग रहा, परिवार ने उनके मिट्ठू को ढूंढकर लाने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है साथ ही इसके लिए ई रिक्शा से मुनादी भी करवाई जा रही है।

ग्वालियर में कलेक्ट्रेट रोड पर अलकापुरी कॉलोनी के पास एनजी ग्रांड सोसायटी में रहने वाले शशांक ओझा का परिवार पिछले कुछ दिनों से बेचैन है उनकी बेचनी का कारण है उनके पालतू तोते शाकुंतला का गुम हो जाना,  परिवार के अनुसार तोता करीब एक वर्ष से उनके साथ रह रहा था और घर के सदस्यों की तरह परिवार का अभिन्न हिस्सा बन चुका था लेकिन जब स एवो उड़ा है तब से घर में किसी का मन नहीं लग रहा।

50 हजार रुपये की इनाम की घोषणा  

तोते और इस परिवार के प्रेम की कहानी का अंदाजा ऐसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी तलाश के लिए ई रिक्शा से मुनादी करवाई जा रही है, लाउडस्पीकर लगा रिक्शा पूरे क्षेत्र में घूम रहा है परिवार ने शाकुंतला को ढूंढकर लाने वाले को 50 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।

ई रिक्शा पर तोते शाकुंतला की तस्वीर

ई-रिक्शा पर बड़े पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें तोते की तस्वीर के साथ उसका हुलिया बताया गया है, जैसे उसके सिर [पर तिलक है, रिक्शा रोजाना शहर के अलग-अलग इलाकों मे घूम रहा है ताकि अधिक से अधिक लोगों तक सूचना पहुंच सके, ई-रिक्शा चालक सोनू के अनुसार वह प्रतिदिन विभिन्न मोहल्लों और बाजारों में जाकर मुनादी कर रहा है, जिससे तोते के बारे में कोई जानकारी मिल सके औ रवो परिवार तक पहुंच जाए।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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