शीतला माता मंदिर हादसा: समाजवादी पार्टी ने मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग

समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि शीतला माता मंदिर हादसे के मृतकों के परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता राशि मिले और एक पात्र व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिले। 
Sheetla Mata Temple incident Samajwadi Party allegations mp government

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समाजवादी पार्टी ने शीतला माता मंदिर में मरने वाले लोगों के परिजनों के लिए 50 लाख रुपये सहायता राशि और एक पात्र व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की मांग की है, सपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने ग्वालियर में मीडिया से बात करते हुए प्रदेश सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाये उन्होंने हादसे को सरकारी हत्या भी कहा।

डॉ मनोज यादव ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाका तकी और उन्हें इस बात का भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी है, डॉ यादव ने मृतकों के परिजनों के साथ ग्वालियर प्रेस क्लब में मीडिया से बात की और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा।

मनोज यादव ने कहा ये सरकार के सभी अधिकारी कर्मचारी भ्रष्ट हैं वरना नो एंट्री में ट्रक कैसे घुस सकता था , उन्होंने कहा इस हादसे में किसी की मृत्यु नहीं हुई है बल्कि भाजपा सरकार की लापरवाही के कारण इन लोगों की हत्या हुई है, डॉ यादव ने कहा मैं पीड़ित परिवारों से मिला हूँ उनका कहना है कि सरकार ने केवल संबल योजना के 4 लाख रुपये दिए हैं शेष कोई सहायता नहीं दी।

50 लाख मुआवजा, सरकारी नौकरी की मांग 

सपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा लोगों ने सरकारी नौकरी की मांग की लेकिन उन्हें आउट सोर्स के माध्यम से यानि कांट्रेक्ट बेस पर नौकरी की पेशकश की गई जिससे ये लोग संतुष्ट नहीं है, समाजवादी पार्टी भी इनके इस फैसले में इनके साथ है उन्होंने कहा हमारी मांग है कि प्रत्येक मृतक परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता राशि मिले और एक पात्र व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिले।

सपा ने ये मांग भी की 

डॉ यादव ने कहा हमारी भी मांग है कि जो लोग पूरी तरह से दिव्यांग हो गए उनको भी 50 लाख रुपये की मुआवजा राशि और उनके परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए और घायल को 5 लाख रुपये की सहायता मिलनी चाहिए।  उन्होंने कहा जब तक इनकी मांगें पूरी नहीं होती समाजवादी पार्टी इनके साथ खड़ी है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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