बाहरी छात्रों के प्रवेश के विरोध में MLB कॉलेज में हंगामा, छात्रों ने की तालाबंदी

बाहरी छात्रों के प्रवेश के विरोध में MLB कॉलेज में हंगामा, छात्रों ने की तालाबंदी

ग्वालियर । शहर के एमएलबी कॉलेज में आज छात्रों ने जमकर हंगामा कर दिया और कॉलेज के प्रशासनिक भवन सहित कॉलेज परिसर के अन्य कक्षों की तालाबंदी कर दी। अचानक हुई तालाबंदी से सकते में आये प्रभारी प्रिंसिपल और कॉलेज के प्रोफेसर बमुश्किल बाहर निकल सके। हंगामा बढ़ते देख कॉलेज प्रशासन ने पुलिस को मौके पर बुला लिया।

दरअसल मंगलवार को कुछ बाहरी छात्र, कॉलेज में पढ़ने वाले एक छात्र के साथ मारपीट कर दी। बताया जा रहा है कि जिस छात्र के साथ मारपीट हुई वो ABVP का कार्य कर्ता है। मारपीट को लेकर ABVP और NSUI ने आज संयुक्त रूप से विरोध जताया और जबरदस्त नारेबाजी की। गुस्साए छात्रों ने प्रशासनिक भवन की तालाबंदी कर दी और परिसर में दूसरे कक्षों के दरवाजे बंद कर दिये। अचानक हुई तालाबंदी से प्रभारी प्रिंसिपल सहित अन्य प्रोफ़ेसर और स्टाफ घबरा गया और मुश्किल से बाहर निकल पाए। छात्रों का कहना था कि बाहरी छात्र कॉलेज में घुस आते है जिसको लेकर वे कई बार कॉलेज प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं। वे कॉलेज में सीसी टीवी कैमरे लगाने की भी मांग कर चुके हैं लेकिन कॉलेज प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा। उधर प्रभारी प्रिंसिपल सीपी गुप्ता का कहना था कि छात्रों ने अभीतक अपनी मांगों से जुड़ा कोई ज्ञापन नहीं दिया है। रही बता कैमरे लगवाने की तो इसका प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग को भेज दी है। जैसे ही बजट और स्वीकृति आती है कैमरा लगवा दिये जायेंगे।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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