करनाल में 53वीं महापौर परिषद की वार्षिक बैठक, दिखाई शहरी कायाकल्प की राह

करनाल में 53वीं महापौर परिषद की वार्षिक बैठक, दिखाई शहरी कायाकल्प की राह

haryana 53rd annual meeting

हरियाणा में यह पहला मौका था जब करनाल ने अखिल भारतीय महापौर परिषद की 53वीं वार्षिक बैठक की मेजबानी की। इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के 21 राज्यों से 70 से अधिक महापौर मौजूद थे। सभापति के तौर पर बैठक का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया। उनके भाषण का लहजा स्पष्ट था, स्वच्छता, बेहतर संसाधन प्रबंधन, और योजनाओं का पारदर्शी खर्च ही शहरों को स्मार्ट बना सकता है।

मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि आगामी 15 वर्षों में देश की आधी आबादी शहरों में रहने लगेगी, ऐसे में स्थानीय निकायों की जवाबदेही और जिम्मेदारी का महत्व बढ़ता जाएगा। एमएफआइ ने जोर देकर कहा कि महापौरों को अब और अधिकार मिलें—विशेषकर चुनाव, वित्तीय संसाधन, और नीति निर्माण में निर्णायक भूमिका की आवश्यकता है। इसके साथ ही एक समान शहरी कानून—“One Nation–One Municipal Act” लागू करने पर चर्चा हुई, ताकि स्थानीय शासन में एकरूपता और दक्षता आये।

करनाल की महापौर

करनाल की महापौर रेनू बाला गुप्ता को सर्वसम्मति से इस परिषद की अध्यक्ष चुना गया। उन्होंने सभी महापौरों का धन्यवाद किया और भरोसा जताया कि वे सभी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगी। उनकी इस जीत को करनाल के लिए गर्व की बात बताया गया। करनाल में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं, बल्कि शहरी विकास और सामूहिक नेतृत्व की नई शुरुआत का प्रतीक बना।

अनुभव साझा किए गए

लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के अपने अनुभव साझा किए, जिससे अन्य नगर निगमों को प्रेरणा मिली। इस तरह की एक साझा मंच ने नगर निकायों के बीच सीख-बूझ और सहयोग का माहौल तैयार किया। रेनू बाला गुप्ता का चुनाव, स्थानीय शहरी प्रबंधन के प्रति राष्ट्रीय मंच से मिला मान और सुझाव, और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर जोर—यह एक मजबूत संकेत है कि अब नगर सरकारें सक्रिय, उन्नत और जिम्मेदार बन रही हैं।

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