सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल को मिली बड़ी राहत, अनुयायियों की मौत के मामले में उम्रकैद की सजा निलंबित, जानें पूरा मामला

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सतलोक आश्रम प्रमुख संत रामपाल की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया है। 2018 में हत्या और आपराधिक साजिश के मामलों में दोषी ठहराए गए रामपाल को यह राहत पांच अनुयायियों की मौत वाली बरवाला झड़प से जुड़े केस में मिली है।
सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल को मिली बड़ी राहत, अनुयायियों की मौत के मामले में उम्रकैद की सजा निलंबित, जानें पूरा मामला

कभी अपने सतलोक आश्रम और विवादित बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में रहे स्वयंभू संत रामपाल एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जिसने उनकी आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया है। साल 2018 में रामपाल को हत्या और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। लेकिन अब करीब 5 साल बाद उन्हें राहत मिली है। इस फैसले से उनके लाखों अनुयायियों में खुशी की लहर दौड़ गई है, जबकि दूसरी तरफ पीड़ित पक्ष में निराशा भी है। सवाल यह उठता है कि आखिरकार रामपाल को किस मामले में सजा मिली थी और अब क्यों राहत दी गई?

दरअसल, साल 2018 में हिसार की एक अदालत ने सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल और उनके कुछ अनुयायियों को दोषी करार दिया। आरोप थे हत्या, बंधक बनाना और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर अपराधों के। दरअसल, ये मामले 19 नवंबर 2014 को दर्ज हुए थे, जब हिसार जिले के बरवाला थाने में पुलिस और आश्रम अनुयायियों के बीच जमकर भिड़ंत हुई थी।


बरवाला झड़प और पांच मौतें

हिसार जिले के बरवाला शहर में स्थित सतलोक आश्रम में पुलिस ने 2014 में कार्रवाई की थी। इसी दौरान पुलिस और अनुयायियों के बीच भीषण झड़प हुई। हालात इतने बिगड़े कि चार महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया था और मीडिया की सुर्खियों में लंबे समय तक छाया रहा।


हाई कोर्ट में याचिका और राहत

रामपाल की कानूनी टीम ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उम्रकैद की सजा को निलंबित करने की मांग की। जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए रामपाल को राहत दे दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपील लंबित रहने तक सजा निलंबित रहेगी।


अनुयायियों में खुशी, विरोधियों में सवाल

फैसले के बाद जहां सतलोक आश्रम और रामपाल के अनुयायियों ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया, वहीं विरोधी पक्ष का कहना है कि यह पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है। हालांकि कानूनी तौर पर अभी भी अपील प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है।

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