30 जुलाई से 4 अगस्त तक खुलेगा पूरा इंदौर,त्योहारों के मद्देनजर लिया फैसला

30 जुलाई से 4 अगस्त तक खुलेगा पूरा इंदौर,त्योहारों के मद्देनजर लिया फैसला

इंदौर/आकाश धोलपुरे

इंदौर में मंगलवार रात हुई बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया है। ईद और राखी के त्यौहार को ध्यान में रखते हुए बीजेपी नेताओं के साथ हुई बैठक में 6 दिन के लिए पूरा इंदौर खोलने का निर्णय लिया गया है।

दरअसल, रेसीडेंसी कोठी पर मंगलवार रात 8 बजे प्रशासन, पुलिस और भाजपा नेताओं की बैठक संपन्न हुई। ये बैठक आगामी त्योहारों के मद्देनजर महत्वपूर्ण मानी जा रही थी और जब बैठक समाप्त हुई तो शहरवासियों और व्यापारियों के लिये एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि 30 जुलाई से 4 अगस्त तक त्योहारों के मद्देनजर समूचे शहर को खोला जाएगा। हालांकि बैठक में एक बार फिर ये मुद्दा भी उठा कि यदि लोगो और व्यापरियों ने कोविड नियमो का पालन नही किया तो पुनः प्रशासन पुरानी पाबंदियों के साथ बाजार खोलने की अनुमति के लिए बाध्य रहेगा। इस निर्णय पर इंदौर कलेक्टर जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेंगे। शहर को मिलने जा रही 6 दिन की छूट के साथ ही व्यापारियों और आम लोगो के ऊपर ये भी जिम्मेदारी भी है कि वो सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के साथ ही मास्क अनिवार्य रूप से पहने इसके साथ ही सेनेटाइजर का उपयोग भी अत्यंत जरूरी होगा।

इधर, होम क्वारेंटाइन हो चुके इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने लोगो से सावधानी रखने की अपील का एक वीडियो भी जारी किया है। त्यौहारों को देखते हुए आने वाले कुछ दिनों के लिए पूरा शहर खोला जा रहा है लेकिन कोरोना का खतरा बना हुआ है इसलिए बेहद सावधानी रखें। साथ ही अपने और परिवारजनों की सेहत का ख्याल रखें।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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